अस्पताल से दुत्कारे गए विकलांग ने डीएम ऑफिस में किया खुदकुशी का प्रयास 

0
74

उरई/जालौन ब्यूरो : प्रदेशी की योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार के लिए भले ही निरंतर प्रयास किए जा रहे हों और चिकित्सकों को तमाम दिशा निर्देश दिए जा रहे हों, पर हकीकत के धरातल  पर देखें तो यह आदेश और दिशा निर्देश केवल हवा में ही हैं। जमीन पर अभी तक इन निर्देशों का कोई क्रियान्वयन शुरू नहीं हुआ है। स्वास्थ्य कर्मचारियों की मनमानी किस हद तक है इसका एक नजारा सोमवार को उरई के कलेक्टेट परिसर में देखने को मिला। जहां पर एक युवक ने इलाज न सरकारी अस्पताल में इलाज न मिलने से क्षुब्ध होकर खुदकुशी करने का प्रयास किया। हालांकि वह अपने मंसूबों में सफल नहंी हो पाया और इससे पहले ही कलेक्टेट के कर्मियेां ने उसे देखकर ऐसा करने से रोक लिया। इस पर विकलांग ने कर्मचारियों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस व एम्बुलेंस ने उसे इलाज के लिए जिला अस्तपाल में भर्ती कराया है।

 

ग्राम कपासी निवासी मंगल 45 वर्ष पुत्र हरू इन दिनों उरई की कांशीराम कॉलोनी में रहता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगल एक पैर से विकलांग है और नशे का आदी भी है। उसे काफी समय से सीने में दर्द की शिकायत है।  इसका इलाज कराने के लिए कई बार जिला अस्पताल गया, पर हर बार चिकित्सक व अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे इलाज करने के बजाए भगा दिया। कई बार वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा पर उसे हर बार दुत्कार ही मिली। इससे क्षुब्ध होकर विकलांग युवक सोमवार की दोपहर तकरीबन दो बजे कलेक्टेट पहुंचा और यहां पर परिसर में एक पेड पर फांसी का फंदा डालकर खुदकुशी का प्रयास करने लगा। तभी वहां पर मौजूद कलेक्टेट कर्मियों ने उसे देख लिया और उनमें हडकंप मच गया। आनन-फानन में कर्मचारियों ने विकलांग को पकडा और उसे खुदकुशी करने से रोका। इस पर विकलांग ने कर्मचारियों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। आनन-फानन में इसकी जानकारी कोतवाली पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस व एम्बुलेंस विकलांग युवक को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गई। जहां पर उसका उपचार किया जा रहा है। युवक का आरोप है  िकवह कई बार अपना इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल गया। हर बार उसे दुत्कार कर भगा दिया जाता है। इस गंभीर मामले में अभी तक किसी अधिकारी ने संज्ञान नहंी लिया है। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले के स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है और अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं। अब देखना यह है  िक एक विकलांग युवक को खुदकुशी तक के लिए मजबूर करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों स्वास्थ्य महकमे के इन दोषी कर्मचारियों पर के प्रति क्या रुख अपनाया जाता है?

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here