ख़राब नलकूपों के कारण किसानों को हो रही सिंचाई में कठिनाई

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बांगरमऊ/उन्नाव(ब्यूरो)- बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में सरकारी नलकूपों की संख्या तो खूब है लेकिन उनमें चालू सिर्फ दो ही चार नलकूप हैं । जिन गांवों के नलकूप बंद पड़े हैं वहां के किसानों के ऊपर बिना पानी दिए ही सिचाई शुल्क चढ़ाया जा रहा है । जिससे क्षेत्र के किसानों में रोष है। सरकारी नलकूप खराब होने से किसानों को खरीफ की फसलों की बुआई करना समय से संभव नहीं लग रहा और किसान अपने निजी नलकूपों की व्यवस्था कर महंगी दरों पर सिंचाई करने के लिए बिवस है।

बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के विकास खंड गंज मुरादाबाद में जोगीकोट, ब्योली इस्लामाबाद, मठुकरी ,रूरी रसूलपुर, सुल्तानपुर, रघु रामपुर और गंज ग्राम सहित लगभग एक दर्जन ग्रामों में सरकारी नलकूप स्थित है। इन नलकूपों में रूरी रसूलपुर और सुल्तानपुर के नलकूप तो चालू है। शेष में कोई विद्युत दोष के चलते तो कोई तकनीकी खराबी के चलते खराब पड़ा है। इसी तरह विकासखंड बांगरमऊ में मुस्तफाबाद, नेवलापुर, असद, कमलापुर , गढा आदि ग्रामों को मिलाकर यहां भी लगभग एक दर्जन ग्रामों में सरकारी नलकूपों की स्थापना कर रखी गई है । यहां भी गढा और कमलापुर के नलकूप चालू हैं ।बाकी सब बंद पड़े हैं।

इसी तरह विकासखंड फतेहपुर चौरासी में कोडरी भड़ शर नौशहरा, दशहरी,पट्टी हमीद, जुल्फिकार पुर, शकुराबाद, सैंता ग्राम में दो और ग्राम भेड़हा खेड़ा सहित एक दर्जन ग्रामों में सरकारी नलकूपों की स्थापना कर रखी गई है । इन नलकूपों से संबंधित ग्रामों के किसानों को बहुत ही कम दर पर खेतों की सिंचाई करने के लिए पानी उपलब्ध कराने का दावा सिंचाई विभाग द्वारा कर रखा गया है किंतु स्थापित अधिकांश नलकूप बंद पड़े हैं। किसी नलकूप में तकनीकी खराबी है तो कहीं पर बिजली दोष के चलते उनका संचालन नहीं हो पा रहा है।

इतना ही नहीं नलकूपों से खेतों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई नालियां अधिकांश जगहों की टूट गई है । उनमें डाले गए पाइप लाइनें विलुप्त हो गई है और रखरखाव के अभाव में नलकूप भवन भी धीरे-धीरे गिरकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। संबंधित ग्राम क्षेत्रों के किसानों का आरोप है कि कई कई वर्षों से उनके यहां के नलकूप ठप पड़े हैं किंतु विभाग द्वारा उनके पास लगातार सिंचाई के बिल प्रेषित किए जा रहे हैं । ग्राम भड़ शर नौसहरा निवासिनी महिला कृषक श्याम वती पत्नी देश राज सिंह ने बताया कि उनके गांव में एक नहीं दो-दो नलकूप स्थापित हैं किंतु उन का संचालन पिछले चार पांच वर्षो से नहीं किया जा रहा है और विभाग उनके पास सिंचाई शुल्क के बिल प्रेषित कर रहा है। इसी तरह गांव कोडरी निवासी किसान मित्र नरेंद्र कुमार यादव ने जानकारी दी कि उनके गांव का भी नलकूप पिछले काफी अरसे से बंद है और विभागीय अधिकारी कर्मचारी कभी बिजली दोष बताकर और कभी तकनीकी खराबी बता कर किसानों को बेवकूफ बनाते चले आ रहे हैं ।

उनका भी आरोप था कि विभाग उनके गांव के भी किसानों के पास लगातार सिंचाई के बिल प्रेषित कर रहा है जिस से संबंधित किसानों में विभाग के प्रति प्रति रोष बनता जा रहा है जो किसी भी दिन आंदोलन और प्रदर्शन का रूप ले सकता है । तहसील क्षेत्र के किसान राजेश यादव, राजबहादुर, शिवदयाल, गंगा नारायण , पप्पू सिंह, रामविलास आदि ने बताया कि सरकारी नलकूपों से किसानों का कोई भला नहीं हो पाता है। रबी की फसलों की भी सिंचाई उन्हें निजी नलकूपों से करनी पड़ी थी और अभी तक बरसात न होने से खरीफ की फसलों में धान की नर्सरी लगाने के लिए उन्हें निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है।

इन लोगों ने बताया कि जिन किसानों के पास मशीनें हैं उनको तो सिर्फ डीजल के ही दाम खर्च करने पड़ते हैं किंतु जिन के पास मशीनें नहीं है उन्हें किराए के संसाधनों का सहारा लेना पड़ता है और इससे उनको काफी महंगे दामों में सिंचाई के लिए पानी मिल पाता है। इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी लघु सिंचाई दिलीप कुमार ने बताया नलकूपों की देखरेख कृषि विभाग द्वारा की जा रही है । कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी कृषि अरविंद त्रिपाठी फतेहपुर चौरासी व गंजमुरादाबाद के देवी सिंह ने बताया कि खराब नलकूपों की सूचना प्रतिमाह जिला मुख्यालय को प्रेषित कर दी जाती है। वहीं से इनके ठीक कराने की व्यवस्था की जाती है।

रिपोर्ट- रघुनाथ प्रसाद

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