न जाने कब बदलेगी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की तकदीर

कुशीनगर ब्यूरो : जनपद अस्तित्व में आए 24 वर्ष बीत गए। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की तकदीर न जाने कब बदलेगी? अफसर आए और गए, हर माह करोड़ों रुपये वेतन अदायगी वाले विभाग की तस्वीर अभी नहीं बदली। जीर्ण-शीर्ण हाल में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे विभाग की उपेक्षा से हर कोई परिचित है। सरकारें आई और गई पर सभी ने इसे उपेक्षित ही रखा। जगह व सुविधा के अभाव में पत्रावलियों यहां-वहां, जैसे-तैसे रखे जाने से बरसात में कार्यालय के दस्तावेज सुरक्षित नहीं रह गए हैं। बता दें कि 13 मई 1994 को देवरिया से पृथक होकर कुशीनगर के रूप में अस्तित्व पाए इस जनपद का मुख्यालय शुरुआत के पांच वर्षों तक पडरौना में रहा। भवन निर्माण के बाद सभी विभाग क्रमश: तीन किमी दूर रवींद्र नगर धूस स्थित खुद के भवन में शिफ्ट हो गए। बावजूद इसके जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय 15 वर्षों तक सदर कोतवाली के सामने किराए के भवन में चलता रहा। 2009 में यहां के तत्कालीन जिलाधिकारी एसबीएस रंगाराव के निर्देश पर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक रामचेत ने जिविनि कार्यालय को जिला मुख्यालय स्थित खुद के भूमि पर आनन-फानन में कटरैन में शुरू कराया। तभी से यह भवन उसी कटरैन में संचालित हो रहा है। हर वर्ष जिला योजना समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर इसे शासन को भेजा जाता रहा, लेकिन धन का रोना रोकर इसे ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा। बेसिक शिक्षा कार्यालय के सटे उत्तर स्थित आवंटित भूमि के आधे हिस्से में कार्यालय की दशा देखने लायक है। विभागीय उपेक्षा से माध्यमिक शिक्षा विभाग की न तो तकदीर ही बदली न ही तस्वीर। वही आसपास सभी विभाग खुद की अट्टालिकाओं में संचालित हो रहे हैं तो कर्मचारी भी गौरवान्वित महसूस करते। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के कर्मचारी उपेक्षित महसूस कर इस मुद्दे पर कुछ भी मुंह खोलने से परहेज करते।

स्वीकृत हुआ 91.33 लाख
जिला विद्यालय निरीक्ष उदय प्रकाश मिश्र कहते हैं विभाग के भवन के लिए बीते वर्ष 91.93 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ। प्रथम किश्त के रूप में पांच लाख रुपये अवमुक्त हुआ जिससे डोर लेवल तक का निर्माण कार्यदायी संस्था द्वारा करा दिया गया है। भवन निर्माण कार्य महीनों से ठप होने का कारण पूछे जाने पर कहते हैं कि द्वितीय किश्त की डिमांड छह माह से की जा रही है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा को दो-दो बार धन की मांग का रिमाइंडर भेजा गया है। उम्मीद है शीघ्र ही धन अवमुक्त हो जाएगा। कहते हैं कि यदि धन शीघ्र अवमुक्त हो गया तो एक वर्ष के भीतर विभाग का खुद का भवन उपलब्ध हो जाएगा। एक सवाल के जवाब में जिविनि ने कहा कि कोई विकल्प न होने के कारण कटरैन में कार्य करना विवशता है।

रिपोर्ट – राहुल पाण्डेय

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