जनपद की रिपोर्ट , चुनाव समीक्षा

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सोनभद्र : विधानसभा घोरावल में जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के ऊपर चुनावी बुखार भी चढ़ता जा रहा है । नामांकन के बाद धड़ाधड़ चुनावी कार्यालयों के उद्घाटन भी हो रहे है । नेताओं द्वारा एक बार फिर मतदाताओं को रिझाने का दौर भी चल रहा है और नेता अपने तरीके से हर हथकंडे अपना रहे हैं ।

घोरावल विधान सभा चुनाव मैदान में इस बार सपा कांग्रेस गठबंधन ने वर्त्तमान विधायक रमेश चंद्र दुबे को अपना प्रत्याशी बनाया है । हालाँकि चाचा-भतीजे के झगड़े में रमेश चंद्र दुबे का टिकट काट कर जय प्रकाश पांडेय उर्फ़ चेखुर पांडेय को दे दिया गया था । मगर अखिलेश के सुल्तान बनते ही एक बार फिर टिकट वर्तमान विधायक रमेश चंद्र दुबे को मिल गया। श्री दुबे एक बार फिर कराए गए काम को लेकर चुनावी मैदान में जनता के सामने हैं ।

वहीं 2012 के विधान सभा चुनाव में सपा प्रत्याशी से लगभग 15 हजार मतों से शिकस्त खाये बसपा के दो बार विधायक रह चुके अनिल कुमार मौर्या इस बार भाजपा के टिकट पर मौजूदा विधायक को टक्कर देने के लिये रात दिन एक किये हुए हैं । अब बसपा की बात की जाय तो बसपा ने मोहन कुशवाहा का टिकट काट कर सपा छोड़कर आयी बीना सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।बीना सिंह चारो विधान सभा में एक मात्र महिला प्रत्याशी हैं ।

क्षेत्र में विकास व समस्या को लेकर बात की जाए तो 2012 में नए विधानसभा घोरावल का सृजन हुआ था और पहली बार यह खाता सपा की झोली में गया और रमेश चंद दुबे घोरावल के पहले विधायक बने । विधायक बनने के बाद रमेश चंद दुबे का दावा है कि क्षेत्र में जितना काम उन्होंने कराया है पहले कभी नहीं हुआ। मगर लोगों का आरोप है कि विधायक योजनाओं को लाकर अपने ही लोगों से काम कराएं जिसके कारण गुणवत्ता नहीं रही । लोगों का कहना है कि विधायक द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र में इंजीनियरिंग कॉलेज तो बनवा दिया गया मगर पढ़ाई यहां के बजाय सुल्तानपुर में चल रही है । लोगों का कहना है कि विधायक काम की बात जरूर करते हैं मगर जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही है । लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर घोरावल में बुरा हाल है । लोगों को स्वास्थ सेवाओं के लिए रावर्ट्सगंज जाना पड़ता है । शाहगंज में कोई भी व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी है । स्थानीय लोगों का कहना है कि घोरावल क्षेत्र अंतर्गत शाहगंज में महोरिया का जंगल को आज तक पर्यटक का दर्जा नहीं मिल सका । यहां पाए जाने वाले काले हिरन पर्यटकों को काफी आकर्षित कर सकता है । उनका मानना है कि यदि क्षेत्र पर्यटक के रूप में विकसित किया जाता है तो ना सिर्फ क्षेत्र का विकास होता बल्कि रोजगार की उपलब्धता भी बढ़ती । कई लोगों का कहना है कि शाहगंज घोरावल और रावर्ट्सगंज बीच में बसे होने के कारण शाहगंज की उपेक्षा हमेशा जनप्रतिनिधि करते रहे हैं । जिसका प्रमाण यह है कि क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का आज भी टोटा लगा हुआ है । पीने के पानी लोगों को सही ढंग से मुहैया नहीं हो पा रहा है ।

लोगों का कहना है कि घोरावल विधानसभा 2012 के पहले राजगढ़ विधानसभा में आता था और यहां से वर्तमान भाजपा के प्रत्याशी अनिल मौर्या बसपा विधायक के रूप में दोबारा अपनी सेवा दे चुके हैं । मगर क्षेत्र का कोई खास विकास नहीं करा सके । शायद यही कारण था कि नए विधानसभा बनने के बाद लोगों ने अपना नया विधायक चुन लिया तथा अनिल मौर्या को बाय-बाय कर दिया । इस बार अनिल मौर्या भाजपा से प्रत्याशी हैं उन्हें क्षेत्र का पहले से ही काफी ज्ञान रहा है । इस बार उन्हें सामने 2012 के हार का बदला लेने का मौका भी मिल गया है । देखने वाली बात यह होगी कि अनिल मौर्य विकास कार्य को लेकर जनता को अपने पक्ष में कितना कर पाते हैं । वही चारों विधानसभा में एक मात्र महिला प्रत्याशी बीना सिंह को बसपा से टिकट मिला है । कई बार जिला पंचायत अध्यक्ष पर पद की लड़ाई को लेकर चर्चा में रही बीना सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तो नसीब नही हो सकी । इस बार विधान सभा चुनाव में विधायक की कुर्सी की लड़ाई में कितना सफल हो पाती हैं यह तो वक्त ही बताएगा ।

बतातें चलें कि घोरावल विधान सभा चुनाव की सरगर्मियां तो तेज जरूर हो गयी है पर मतदाताओं का मिजाज देखा जाय तो अभी कुछ साफ़ नहीं है बहरहाल अब देखने वाली बात यह है कि चुनावी दंगल में जनता जनार्दन 8 मार्च को किसे अपना आशीर्वाद देती है और इस बार जनता किन मुद्दों को लेकर अपना वोट करती है ।

रिपोर्ट -ज़मीर अंसारी

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