नवाचारियों की तलाश करेगा जिला विज्ञान क्लब

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प्रतीकात्मक

बलिया(ब्यूरो)- सच ही कहा है कि आवश्यकता अविष्कार की जननी है और आवश्यकता हमे संसाधनों के अभाव में जुगाड़ करने में मजबूर कर देती है। आज इसी जुगाड़ शब्द को वैज्ञानिक भाषा में अविष्कार भी कहते है। ऐसा अक्सर पाया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया नवाचार जुगाड़ शब्द के दायरे में सिमटकर खत्म हो जाता है। पर अब ऐसा नहीं होगा। दरअसल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद प्रदेश के सभी जिलों में जिला विज्ञान क्लब के माध्यम से ऐसे हुनरबाज नवाचारियों की तलाश करेगा।

प्रदेश सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवप्रवर्तनों/इनोवेटर्स को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विशेष बल दिया जा रहा है। जिससे नव अन्वेशकों को जो ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में कार्यरत है एवं जिन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की है। उनके शोधों एवं अविष्कारों को सहयोग प्रदान किया जा सके। इस कार्य हेतु ग्रास रूट लेबल के नवप्रवर्तन केन्द्र की स्थापना किया गया है। सभी ग्राम प्रधानों की जल्द ही जिला स्तर पर दो गोष्ठियों का आयोजन होगा ताकि उनके द्वारा गांव में हुई नई खोज, नये अविष्कार करने वालों के बारे में पता चल सके व ऐसे नवप्रवर्तकों को आसानी से चिन्हित किया जा सके। ऐसे चिन्हित नवाचारियों की जिला स्तर पर एक प्रदर्शनी आयोजित की जायेगी।

नवाचारियों की सूची परिषद को भेजी जायेगी, इसके बाद उन्हें राज्य स्तर पर आमंत्रित किया जायेगा। इसके साथ ही सभी बोर्ड के 12वीं तक के छात्रों को भी अपने इनोवेशन को प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। किसान, शिल्पकार, कारीगर, मित्री, परम्परागत उपचार करने वाला, विद्यार्थी, जन सामान्य, व्यवसायिक पाठ्यक्रम जैसे इंजिनियरिंग, चिकित्सा इत्यादि पाठ्यक्रम से जुडे़ न हो तथा स्नातक डिग्री धारक न हो। यंत्र, मशीने, परिवहन के साधन, घरेलु उपयोग के सामान, जैव विविधता के सृजनात्मक उपयोग, पौधों की प्रजातियों, पशुओं व मानव के लिए हर्बल औषधी या जड़ीबूटी, ऊर्जा उत्पादन या संरक्षण के लिए उपकरण, उपजी तरकिबे ऐसे सृजनात्मक करें। जिला विज्ञान क्लब बलिया के समन्वयक डा.सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी आयु के वर्गों के लोगों के हुनर को आगे बढ़ाने का एक सुनहरा मौका है तथा इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक सोच का विकास करना है।

रिपोर्ट- संतोष कुमार शर्मा 

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