दरोगा पर दिव्यांग युवती ने लगाया छेड़छाड़ का आरोप

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हापुड़ (ब्यूरो)-यूपी पुलिस पर आपने अब तक रिश्वतखोरी का आरोप तो कई बार सुना होगा और रिश्वत लेते भी कई बार देखा होंगे, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी खबर दिखाने जा रहे हैं जिसके बाद जनता का यूपी पुलिस पर से विश्वास उठ जाएगा। मामला दिल्ली से सटे एनसीआर के जनपद हापुड़ का है।यहां एक दिव्यांग युवती ने एक दरोगा समेत दो लोगों पर छेड़छाड़ व बतमीजी के गंभीर आरोप लगाए है। दरोगा और दोनों युवकों की छेड़छाड़ व तंज कसने की हद ज्यादा बढ़ गयी तो, दिव्यांग युवती ने दो दिन पहले जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश भी की। जिसको आसपास के लोगो ने बचा लिया।

कई दिनों से पुलिस के चक्कर काटने के बाद आज फिर दिव्यांग युवती ने कप्तान से न्याय की गुहार लगाई है। मामले में कप्तान ने एक बार फिर मामले को रफा-दफा करते हुए जाँच के आदेश दे दिया। दिव्यांग पीड़िता को फिर से धक्के खाने के लिए मजबूर कर दिया।आपको बता दें कि मामला गढ़ कोतवाली क्षेत्र का है। यहां एक अनाथ युवती किराए के मकान में रहती है और तीन हजार रूपये की किसी कम्पनी में जॉब करती है।पीड़िता का आरोप है की उसी किराए के मकान में एक दरोगा विनोद भी रहता है, जोकि सिम्भावली थाने में तैनात है। युवती का आरोप है कि उस दरोगा के किसी महिला से अवैध संबंध है और वो भी मकान में आया जाया करती है। इस बात को लेकर दिव्यांग युवती उसका विरोध करती है। कुछ दिन पहले दरोगा ने दो युवको से साथ मिलकर दिव्यांग युवती से पहले तो बतमीजी की और फिर आरोप है कि दरोगा ने उसके साथ छेड़छाड़ भी किया।

इस मामले को लेकर पीड़िता थाने भी पहुंची, लेकिन पुलिस ने उसकी एक ना सुनी। जब थाने में पीड़िता की कोई सुनवाई नहीं हुई तो पीड़िता न्याय के लिए तीन दिन पूर्व एसपी से न्याय की गुहार लगाने आई। मामला सामने आने के बाद एसपी ने थाने में जाँच के आदेश कर दिए, लेकिन फिर भी पीड़िता की कोई सुनवाई नहीं हुई। जब अधिकारियों के पास जाने से बाद भी पीड़िता को न्याय नहीं मिला तो, पीड़िता ने दरोगा से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया । जिसको गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।आज पीड़िता की हालत में सुधार आया तो आज फिर पीड़िता ने एसपी के पास आकर न्याय की गुहार लगाई। मामले में फ़िलहाल एसपी ने गढ़ इंस्पेक्टर को पूरे मामले की जाँच करने के आदेश दिए हैं और अब देखने ये होगा की इस मामले में कब तक जाँच पूरी होती है।

रिपोर्ट- अतुल त्यागी

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