कृषि, श्रम, पूर्ति, पीडब्लूडी, समेत कई विभागों में नहीं माना गया डीएम का आदेश

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हरदोई ब्यूरो : भृष्टाचार एवं कर्मचारियों की लापरवाही को रोकने के लिए डीएम शुभ्रा सक्सेना ने सभी विभागों के बाबुओं के पटल परिवर्तन का आदेश दिया था। किन्तु बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, लघु सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, श्रम विभाग, कृषि समेत तमाम मुख्य कार्यालयों में एक ही पटल पर 10 से लेकर 28 साल से डटे बाबुओं के अभी तक पटल परिवर्तित नहीं किये गए।

बेसिक शिक्षा विभाग में ट्रांसफ़र/पोस्टिंग का पटल देख रहे प्रमोद शुक्ला 10 साल से इसी पटल पर हैं। कमाई वाले इस पटल के सारे दांव पेंच में माहिर प्रमोद को बीएसए ने इस पटल से हटाने की अभी तक जहमत नहीं उठाई।
72825 भर्ती शिक्षकों का पटल देख रहे प्रवीण मिश्रा 06 साल से एक ही पटल पर डटे हैं। हरपाल 10 साल से तो श्रवण मिश्रा 28 साल से एक ही पटल पर कब्जा जमाये हुए हैं। डीएम के सख्त आदेश के बावजूद भी आखिर इन बाबुओं के पटल क्यों नहीं बदले जा रहे, ये बड़ा सवाल है। बेसिक शिक्षा से जुड़े सूत्रों की मानें तो उक्त महत्वपूर्ण पटल से अच्छी कमाई होती है, इसलिए पुराने बाबुओं को नहीं हटाया जा रहा है। यही हाल डीआइओएस कार्यालय में है। प्रदीप बाबू 20 साल से एक ही पटल पर डटे हैं। इस विवादित बाबू के बड़े बड़े कारनामे उजागर होने के बाद भी पटल से नहीं हटाया गया। डीएसओ दफ्तर में प्रदीप श्रीवास्तव 20 साल से स्टेनो के पद पर कार्यरत होते हुए बाबूगिरी कर रहे हैं। श्रम विभाग में ईश्वरचंद्र मिश्रा रिश्वत कलेक्शन सेंटर के रूप में जाने जाते हैं। 12 सालों से भी अधिक समय से इनके द्वारा फर्जी लाभार्थी तैयार कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को चूना लगाया जा रहा है।

वहीं कृषि, सिंचाई व पीडब्ल्यूडी व जिला पूर्ति कार्यालय का इससे भी बुरा हाल है। कई सालों से डटे बाबुओं का पटल बदलने में विभागीय अधिकारी कतरा रहे हैं। ऐसे में उक्त विभागों के अधिकारियों की भृष्टाचार में संलिप्ता स्पष्ट हो रही है, और इसे जिलास्तरीय अधिकारियों की दबंगई ही कहा जायेग, क्योंकि इनके लिए डीएम का आदेश कोई मायने नहीं रखता।

रिपोर्ट- रवि मिश्र

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