डरिये मत, डराइये मत, पहले देखिये, उसके बाद कोई राय क़ायम कीजिये

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आपकी बात-  ‘डरिये मत, डराइये मत, पहले देखिये, उसके बाद कोई राय क़ायम कीजिये|’ नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चयन पर ज़हनों में बेचैनी है| गंगा जमुनी तहज़ीब वाले इस प्रदेश में राजनीति की क्या नयी धारा बहेगी? मुसलमान का क्या होगा? ये सवाल हर जगह जवाब तलाश रहा है। हिंदुत्ववादी उत्साह से भरे हैं, सवालों पर नए सवाल को उभार रहे हैं। आखिर एक हिन्दूवादी देश के सबसे बड़े प्रदेश की बागडोर सम्भालने जा रहा है।

गोरखपुर के मुसलमान आराम से हैं, उन्होंने योगी की ताजपोशी पर मिठाई भी बांटी। योगी का एक चेहरा और भी है, ये वो बता रहे है। डर कर कह रहे हैं, न न ऐसा ही है, एक साहब ज़ोर देकर कहते हैं। योगी एक राजनेता हैं, अपनी राजनीति अपने हिसाब से करते हैं, अति हिंदूवादी चेहरा उनकी पहचान है लेकिन गोरखनाथ मंदिर जो उनकी राजनीति का केंद्र है उसके परिसर में मुसलमान की तमाम दुकानें हैं। इस केंद्र के आस-पास मुसलमान की बड़ी आबादी है और ये लोग कभी हटाये नहीं गए न परेशान किये गए।

योगी के पास बड़ी तादाद में मुसलमान अपने काम लेकर जाता है, कभी खाली हाथ नहीं लौटा। एक ने बताया वो अपने काम के लिए दौड़ दौड़ कर परेशान थे, योगी के पास गए, काम हुआ, पैर छूने की कोशिश में थे, योगी ने रोका, गले लगाया, कहा आपके यहाँ इसकी इजाज़त नहीं है।

दूसरे इस बात से बेहद खुश हैं क़ुरान मजीद जो उन्होंने खुद दिया था योगी उसको अपने कमरे में बाइज़्ज़त रखे हैं
फिर फ़रोग़ मियां, इमामबाड़े के मियां साहब, से योगी के प्रगाढ़ सम्बन्ध छुपे नहीं हैं। उनके पिता तुल्य गुरु महंत अवैधनाथ जब तक इंतज़ार हुसैन से दिन एक बार मिल न लें तो सारा दिन बेचैन रहते थे। दोनों आज नहीं हैं, सम्बन्ध दोनों तरफ से बरक़रार हैं।

मेरा आशय सिर्फ इतना है डरिये मत, डराइये मत। खुले मन से देखिये, खुले मन से देखने दीजिये।

रिपोर्ट अवनीश कुमार मिश्रा
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