दो साल से नहीं मिला है प्रेरकों का बकाया 

बलिया(ब्यूरो)- समाज के निरक्षर लोगों को साक्षर कर उनको समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करने वाले ग्राम स्तर पर कार्यरत प्रेरकों के समक्ष पिछले 2 वर्षों से मानदेय ना मिलने के कारण भुखमरी की नौबत आ चुकी है|

बता दें कि भारत सरकार के साक्षर भारत मिशन अभियान के तहत 15 वर्ष के ऊपर के निरक्षर लोगों को साक्षर करने के लिए जनपद के प्रत्येक गांव में लोक शिक्षा केंद्र खोले गए हैं, जिसमें गांव के ही होनहार एवं योग्य एक महिला तथा एक पुरुष की नियुक्ति की गई है| जिन्हें शासन के द्वारा 2000रु मानदेय मिलता है| यह योजना 2010 से ही संचालित है लेकिन आज तक इस योजना में कार्य करने वाले प्रेरकों एवं कर्मियों का मानदेय समय से नहीं मिल पाया है|

अभी हाल ही में 2 वर्ष से अधिक समय का मानदेय प्रेरकों का बकाया है जबकि इसके लिए जनपद के प्रेरकों ने कई बार आंदोलन की धमकी देकर रैली निकालकर जुलूस प्रदर्शन भी किया बावजूद इसके जिला प्रशासन तथा प्रदेश के सचिवालय में बैठे अधिकारियों के कान में जू तक नहीं रेंग रही है इतनी कम मानदेय पर लोगों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाने वाले प्रेरकों का दु:ख दर्द समझने के लिए ना तो जिले के अधिकारी आगे आ रहे हैं, नहीं जिले के जनप्रतिनिधि ही इनकी आवाज अपने माध्यम से उठाने का काम कर रहे हैं, जिसके चलते प्रेरकों के समक्ष विकट समस्या खड़ी हो गई है|

ग्राम स्तर पर कार्य करने वाले इन प्रेरकों ने अपने जीवन के बहुमूल्य क्षण भारत सरकार के साक्षर मिशन अभियान के तहत निरक्षर ग्रामीणों को साक्षर करने में व्यतीत कर दिया| अब उन्हें न तो मानदेय मिल रहा है नहीं उनके भविष्य में कहीं कोई रास्ता दिखाई दे रहा है| बड़े पैमाने पर जनपद के प्रत्येक गांव में प्रेरकों की संख्या होने के बावजूद शासन के लोग इनके भविष्य को लेकर क्यों मौन है यह समझ में नहीं आ रहा है|

उधर जनपद के प्रेरकों का कहना है कि मानदेय न मिलने के बाद भी हम लोग शासन के निर्देशानुसार आज भी निरक्षरों को साक्षर करने का काम लोक शिक्षा केंद्रों के माध्यम से कर रहे हैं| साथ ही जिला प्रशासन द्वारा अन्य सरकारी कार्यक्रमों में जिले के प्रेरकों की  ड्यूटी लगाई जा रही है, जिसको जनपद के प्रेरक पूरी निष्ठा से भी कर रहे हैं| हमें तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि हम क्या करें प्रेरकों का कहना है कि हमें हमारे भविष्य की चिंता सता रही है कि हम आज इस महंगाई के दौर में महज रू2000 मासिक मानदेय से अपना तथा अपने परिवार का भरण पोषण कैसे कर सकते हैं? सत्ता में बैठे लोगों को जरूर सोचना चाहिए की महंगाई के युग में इतने कम मानदेय पर प्रेरकों का कार्य कैसे चल रहा होगा प्रेरकों ने एक स्वर में मानदेय बढ़ाने की मांग तथा बकाया मानदेय के भुगतान की मांग की।

प्रेरक कल्याण समिति के उपाध्यक्ष अजीत पाठक ने बताया कि प्रेरकों का वर्षों तक मानदेय ना मिलना यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, उन्होंने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रेरकों की दयनीय दशा के बारे में अवगत कराते हुए उनके परिवार के भरण-पोषण लायक मानदेय बढ़ाने की मांग करते हुए बकाया मानदेय भुगतान की मांग की।

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