घरेलू गैस सिलेंडरों का हो रहा व्यवसायीकरण

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महराजगंज/रायबरेली(ब्यूरो)- खाद्य विभाग द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम का कड़ाई से पालन न किए जाने के कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताते चलें कि क्षेत्र में कई स्थानों पर घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग कई वर्षों से बदस्तूर जारी है लेकिन इस पर आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने अंकुश लगाना मुनासिब नहीं समझा।

घरेलू गैस सिलेंडर जिसमें 14 .2 किलोग्राम गैस रहती है जो कि घरेलू इस्तेमाल के लिए सरकार लोगों की सब्सिडी पर उपलब्ध कराती है वही व्यवसायिक रूप से प्रयोग होने वाला सिलेंडर नीले रंग का होता है जिसमें 19 किलोग्राम गैस होती है। घरेलू गैस सिलेंडर सस्ता होने के कारण इसका व्यवसायिक उपयोग धड़ल्ले से जारी है इसका व्यावसायिक उपयोग खासकर होटलों पर व गैस वेल्डिंग कारखानों पर इस क्षेत्र में आसानी से देखा जा सकता है।

घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग काफी समय से बदस्तूर जारी है। जिस से यह प्रतीत होता नजर आ रहा है कि खाद्य विभाग ने मानो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यवसायिक उपयोग की मौन स्वीकृति दे दी है। या तो खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किसी कारणवश कार्य वाही करने से बच रहे हैं। जिसके कारण होटल संचालकों के हौसले बुलंद हैं और खुलेआम घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग करने में उनको किसी प्रकार का अपराध नजर नहीं आ रहा है। खाद्य विभाग की सुस्ती के चलते घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के कारण सरकार को राजस्व की भारी क्षति उठानी पड़ रही है।

महाराजगंज कस्बा क्षेत्र के साथ साथ मऊ, हेलोर ,चंदापुर ,पहरेमऊ, नवोदय चैराहा, डेपार मऊ, शिवगढ़ मोड़ आदि क्षेत्रों में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यवसायिक उपयोग को आसानी से देखा जा सकता है।

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