डॉ.अनिल जोशी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित

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देहरादून (ब्यूरो)- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रलय ने ग्रामीण क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए हिमालयी पर्यावरणीय अध्ययन एवं संरक्षण संगठन के प्रमुख पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया है। दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों डॉ.जोशी को यह सम्मान दिया गया है।

उनकी संस्था हेस्को को देशभर में अकेले इस अवार्ड के लिए चुना गया हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बृहस्पतिवार को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें पुरस्कृत किया।

पद्मश्री डा. अनिल प्रकाश जोशी हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। वे उत्तराखंड के गांव-गांव जाकर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। इसके अलावा देशभर में अनेक स्थानों पर लोगों को जागरूक करने का काम किया।

जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने  के लिए किया पुरस्कृत

राष्ट्रीय तकनीकी दिवस पर गुरुवार को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हेस्को प्रमुख पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी को जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए नेशनल बायोटेक्नोलॉजी सोसल डेवलपमेंट अवार्ड 2017 दिया गया है।

इस अवसर पर डॉ. जोशी ने कहा कि यह सम्मान मिलने से उनकी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है। उनका प्रयास रहेगा कि जैव प्रौद्योगिकी को और बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित उत्पादों के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी।

लोगों को इसके लिए जागरूक कर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनिवार्य आवश्यकताएं प्रदान कर लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने की जरूरी है। इसके लिए आजीविका के लिए अधिक अवसर पैदा करना, लोगों को सशक्त बनाना और सामाजिक विकास करना होगा।

बता दें कि डॉ. अनिल जोशी ने पारंपरिक फसलों को बचाने के लिए ग्रामीणों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने एवं गोबर गैस के प्रति लोगों को जागरूक कर लकड़ी पर निर्भरता को कम करने का काम किया। वहीं जोशी ने प्रदेश में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी सहित कई जनपदों में पुनर्वास का काम किया और फल प्रसंस्करण के प्रति ग्रामीणों को जागरूक कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया।

 

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