व्यापक जल संरक्षण नीति के अभाव में इन क्षेत्रों में गहरा सकता है पेयजल संकट

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प्रतीकात्मक

महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के लगभग एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं जो कई वर्षों से जल उपयोग कार्यों के लिए सिर्फ भूमिगत जल पर ही निर्भर है और इन गाँवों में भूमिगत जल के लगातार हो रहे अधिकाधिक दोहन से लगातार भूमिगत जलस्तर नीचे जा रहा है । जो कहीं ना कहीं चिंता का विषय जरूर है । इस क्षेत्र के खैरहना, पहरेमऊ, अशरफाबाद ओया, पहरावा आदि ग्राम सभाओं के लगभग दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां सिंचाई से लेकर पेयजल तक के लिए प्राकृतिक जल संसाधन के रूप में सिर्फ भूमिगत जल का ही प्रयोग किया जा रहा है। जिससे भूमिगत जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया है।

इस क्षेत्र के लगातार घट रहे भूमिगत जल स्तर के लिए सिंचाई कार्यों में अधिकाधिक भूमिगत जल का दोहन ही मुख्य कारण नहीं है बल्कि इसके पीछे अन्य कई कारण हैं, जिसमें सरकार की जल संरक्षण निति का अभाव, प्राकृतिक जल संरक्षण के लिए तालाबों,पोखरों पर बढ़ते अतिक्रमण, पर्यावरण असंतुलन, लोगों में जल संरक्षण के ज्ञान का अभाव आदि ऐसे कारण हैं जिनके चलते इस क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है जो वास्तव में इस क्षेत्र के लिये चिंता का विषय है। इन क्षेत्रो में सरकार ने जल्द ही जल संरक्षण नीति को बढ़ावा न दिया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं और पेयजल संकट कहीं अधिक बड़ा और व्यापक हो सकता है।

रिपोर्ट- विनय सिंह चौहान

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