जल (पानी, वारिद, अम्बुद, तोय आदि आदि )

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इस संसार में जिस प्रकार से हमें जिन्दा रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती हैं, ऑक्सीजन की आवश्यकता होती हैं ठीक उसी प्रकार से हमें जीने के लिए जल की भी आवश्यकता होती हैं I हम भोजन तो बना लेते हैं लेकिन समुचित मात्रा में जल और हवा के लिए हमें आज भी पूरी तरह से प्रकृति पर ही निर्भर रहना पड़ रहा हैं उसके बावजूद भी हम इसकी और इसकी शुद्धता की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, जबकि हमें यह पता हैं कि अगर जल और वायु प्रदूषित हो गए तो हमारा जीवन संकट में पड सकता हैं, हम मर भी सकते हैं, और आज अगर देखा जाय तो हम एक तरह से मर ही रहे हैं धीरे-धीरे और तड़प-तड़प कर मर रहे हैं I

अगर हम भारत वर्ष की बात करें तो हमारे पास भारत में संसार की 18% आबादी है और दुनिया का 4% पीने योग्य जल और दुनिया की 2.4% भूमि हैं इसका मतलब है की हम अच्छे में हैं और न केवल अच्छे हैं, बाकी की अपेक्षा बहुत अच्छे हैं, लेकिन क्या यह हमेशा के लिए रह सकता हैं, जी नहीं, हमारा जल तेजी से समाप्ति की ओर अग्रसर हो रहा है I जिस तरह से हम अपनी नदियों, तालाबों और जंगलो को समाप्त कर रहे हैं जल्द ही न तो हमारे देश का जल पीने लायक रह जाएगा और न ही वायु ही सांस लेने लायक I उसके बाद तो आप भी जानते है और हम ऊपर बता ही चुके हैं कि स्वच्छ जल और वायु के बगैर तो हमारा सांस लेना बहुत ही मुश्किल ही होने वाला है I

इसलिए मेरे दोस्तों अब समय आ गया हैं जब हम सभी को एक जुट होकर अपने देश के जल को और जंगल को बचाना चाहिए जिससे हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कुछ और भले न दे कर जाय कम से कम सुद्ध हवा और पानी तो देकर जाय I

नहीं तो मित्रों आने वाली हमारी अपनी खुद की संताने हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी, हमें जल-वायु को बचाना ही होगा, आइये जुड़िये हमारे साथ और मिलकर करते हैं एक संयुक्त प्रयास, मरने नहीं देते हैं जल-वायु की आस I

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