एक दसक से अपनी दशा पे आंशू बहाता ये शवदाहगृह

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बांगरमऊ/उन्नाव (ब्यूरो)- कोतवाली क्षेत्र के नानामऊ घाट स्थित शवदाहगृह प्रशाशन की अनदेखी के चलते एक दसक से अपनी दशा पे आंशू बहाता नजर आ रहा है।

बताते चले बांगरमऊ क्षेत्र के गंगातट स्थित नानामऊ घाट पुल के बायीं तरफ शाशन की तरफ से लगभग एक दसक पूर्व शवदाहगृह का निर्माण कराया गया था। जिससे यहाँ आने वाले शवों को जलाया जा सके। व गंगा प्रदूषण में कमी लायी जाये।

स्थानीय लोग बताते है कि जैसे तैसे निर्माण कार्य तो करा दिया गया। जिसमे टीनसेड व चबूतरा पीने के लिए इण्डिया मार्का हैण्ड पाइप की भी ब्यस्था की गयी। किन्तु बिधुत व शव जलाने की मशीन लगभग एक दसक बीत जाने के बाद आजतक प्रशाशन द्वारा ब्यस्था नहीं की गयी। जिससे दूर दराज क्षेत्रो से इस घाट पर शव लाने वाले दसको से इस उम्मीद से आते है। कि शायद इस बार शव जलाने की ब्यस्था चालू मिलेगी । किन्तु दसको से शोपीस बने शव जलाने के चबूतरे आदि की कोई शुध लेने वाला नहीं।

इस बाबत जब गंगातट पर शव लाने वालो से बात की गयी।तो उन्होंने बताया कि यदि शव जलाने की बिधुत द्वारा ब्यस्था हो जाये तो उन्हें काफी राहत मिलेगी। इस बिषय पर जनपद हरदोई स्थित थाना मल्लावां के गांव अकबरपुर निवासी दीनदयाल पुत्र बलऊप्रशाद ने कहा कि उन्हें जब कभी शव की अंतिम क्रिया करनी होती है तो वे लकड़ी के टालो से हजारो की लकडिया खरीदते है।

बांगरमऊ बिल्हौर मार्ग ग्राम मदारनगर के निकट खुले दर्जनों लकड़ी के टाल इसका जीता जागता उदाहरण भी है।
जनपद हरदोई स्थित गौस गंज के छोटू के अनुसार बांगरमऊ बिल्हौर मार्ग स्थित इन लकड़ी के टालो से उन्हें 8 से 10 रूपये किलो तक लकड़ी मिलती है।

यदि प्रशाशन,शाशन द्वारा इसका मरम्मतीकरण कराकर ब्यस्थित कर शव जलाने की ब्यस्था चालू कर दी जाती है ।तो आमजनमानस को तो राहत मिलेगी ही वही साथ ही गंगाप्रदूषण नियंत्रण में भी काफी मदद मिलेगी।

रिपोर्ट-रघुनाथ प्रशाद शास्त्री

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