आय और खर्च दोंनो बराबर, आंकड़े खोल रहे चेयरमैन का पोल

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बलिया (ब्यूरो)- अपनी विशेषताओं और भोजपुरी भाषा क्षेत्र के लोक प्रिय मेला ददरी के प्रसि(ि पर इस वर्ष ग्रहण लगता नजर आ रहा है। नगर पालिका प्रशासन की लचर व्यवस्था वर्तमान समय मंे मेले में आये बाहरी दुकानदारों के लिए आये कोई न कोई संकट का कारण बन रहा है। परम्परा के अनुसार कार्तिक् पूर्णिमा स्नान वाले दिन मेले में आयी सारी दुकानों के आंवटन का कार्य पूरा कर लिया जाता रहा है। परन्तु नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष अजय कुमार समाजसेवी और वरिष्ठ लिपिक प्रमोद चौरसिया के अनुसार अभी तक दुकान आंवटन का कार्य पूरा नहीं हो सका है।

इस लिए अबकी बार मेले में अब तक कितनी और कौन कौन सी दुकाने लगी है की स्थित स्पष्ट नहीं हो सकी है। तो शेष बचे लगभग 15 दिनों मंे बाहरी दुकानदारों को कितना लाभ कमा सकेंगे यही चिन्ता उनको दोहरे आर्थिक मार का संकेत दे रही है।जिसकी किसी को चिन्ता नहीं है। गत 8 नवम्बर से ददरी मेले के नन्दी ग्राम जो 27 नवम्बर को समाप्त हो रहा है गत वर्ष की अपेक्षा आमदनी तो अधिक हुई है लेकिन मेले से सम्बन्धित टेन्ट, लाइट, लाउडीस्पीकर और हैण्डपम्प आर्थिक व्यवस्था आदि पर आने खर्च को जोड़ा जाये तो भी नन्दी ग्राम से नगर पालिका को तो कोई खास लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है।

यदि सूत्रों की बातों पर परीन करे और नगर पालिका की कुल कागजी आय पर नजर डाली जायें तो पिछले वर्ष जहाँ 17 लाख सन्तावन हजार एक सौ 25 रूपये की तुलना में इस वर्ष नन्दी ग्राम से 25 नवम्बर तक 20 लाख 28 हजार एक सौ तीस रूपये की आमदनी हो चुकी है। जो गतवर्ष की तुलना में मात्र 3 लाख के लगभग अधिक बतायी जा रही है। जिसमें नन्दी ग्राम के समापन तक 10 से 15 हजार और बढ़ सकती है। लेकिन मेला के अन्य व्ययों के बढ़ जाने के कारण शायद लाभ शून्य हो जाने की सम्भावना स्पष्ट हो रही है। अब देखना यह है कि नगर पालिका को मीना बाजार से कितनी आय होती है।

रिपोर्ट- अजीत ओझा/मुशीर जैदी

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