वेधछिद्र भूभौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला (बी. जी. आर. एल)

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The Union Minister for Science & Technology and Earth Sciences, Dr. Harsh Vardhan addressing at the Indian Association for the Cultivation of Science (IACS), at Jadavpur, in Kolkata on May 01, 2015.

वेधछिद्र भूभौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के निर्माण कार्य का भूमि पूजन समारोह आज, १ फरवरी २०१६ को हजारमाची, कराड मे किया गया । विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय मंत्री माननीय डॉ. हर्ष वर्धन ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई । श्री. छ. उदयनराजे भोसले, सांसद, श्री. पृथ्वीराज चव्हाण, विधायक दक्षिण कराड, श्री. बालासाहेब पाटिल, विधायक उत्तर कराड, तथा डॉ. एम. राजीवन, सचिव भारत सरकार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रायलय ने भी इस कार्यक्रम मे हिस्सा लिया ।

वेधछिद्र भूभौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला , पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार दवारा वैज्ञानिक ड्रिलिंग जाँच के माध्यम से सामाजिक प्रासंगिकता के चुनौतीपूर्ण भूकंप समस्याओ के समाधान हेतु स्थापित किया जा रहा है । मंत्रालय के कार्यक्रम “Scientific deep drilling in the Koyna intraplate seismic zone’ महाराष्ट्र के अंर्तगत बी. जी. आर. एल की अवधारणा रखी गयी थी । वैज्ञानिक ड्रिलिंग और देश में इस तरह की सुविधा और विशेषज्ञता की कमी के बढ़ते महत्व को समझते हुए बी. जी. आर. एल, वैज्ञानिक ड्रिलिंग, गहरी बोरहोल, भूभौतिकी, भूगर्भीय जाँच और भूकंप अनुसंधान के लिए समर्पित मॉडलिंग के सभी पहलुओं में स्वदेशी क्षमता और विशेषज्ञता विकसित करने के लिए शुरू किया गया है ।

स्थायी बुनियादी ढांचे के अंर्तगत कार्यालय भवन, मुख्य प्रयोगशालायें और अत्याधुनिक कोर संग्राहलय, हज़ारमाची, कराड मे अपने परिसर में विकास के अंर्तगत है । महाराष्ट्र सरकार ने इस परियोजना हेतु आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई है । बी. जी. आर. एल का लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भूकंप अनुसंधान से संवंधित आति विशिष्ट भूभौतिकीय, भूगर्भीय और भू-तकनीकी सुविधाओँ की एक संस्था के रूप में उभरना है।

वैज्ञानिक कार्यक्रम और जांच का विवरण अनुबंध १ मे दिया गया है ।

अनुबंध १ – वैज्ञानिक अनुसंधान से संवंधित

बी. जी. आर. एल (एम ओ ई इस) Scientific deep drilling in Koyna intraplate भूकंपीय क्षेत्र महाराष्ट्र परियोजना को आगे बढ़ायेगा । १९६२ में शिवाजी सागर झील के निर्माण के उपरान्त कोयना क्षेत्र में लगातार जलाशय से संवंधित भूकंप आ रहे हैं । सन १९६७ मे ६.३ की तीव्रता का कोयना भूकंप अब तक का विश्व का सबसे बड़ा जलाशय से उत्पन होने वाला भूकंप है । अब तक इस क्षेत्र मे पांच और पांच से अधिक तीव्रता वाले २२ भूकंप, चार और चार से अधिक तीव्रता वाले २०० भूकंप और हजारो छोटे भूकंप हुए है । सभी भूकंप केवल ३० किलोमीटर X २० किलोमीटर क्षेत्र तक ही सीमित है । कोयना और वारना जलाशयो में पानी के वार्षिक लदान और उतराई चक्र तथा लगातार भुकंपीय गतिविधि के बीज एक मजबूत संवंध स्थापित किया गया है । हालांकि निकट क्षेत्रीय अवलोकन की कमी के कारण जलाशय संवंधित भूकंप की उत्पत्ति से संवंधित मॉडल अनुपलब्ध है।

इस कार्यक्रम के अंर्तगत कोयना क्षेत्र में भूकंप के कारण को समझने के लिए एक अदवितीय योजना बनायी है । इस क्षेत्र में आने वाले भूकंप की गहराई तक पहुचने के लिए गहरे बोरहोल ड्रिल और बोरहोल वेधशाला के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है । भूकंप स्रोत क्षेत्र के निकट अवलोकन से भूकंप मॉडल से संवंधित नई और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान होगी जो कि इससे पहले कभी प्राप्त नहीं हुयी है ।

Source – PIB

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