शिक्षामित्रों को “दिलासा” की घुट्टी पिला रही सरकार

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बैरिया /बलिया| सूबे की सरकार शिक्षा मित्र को बार बार पुनः समायोजन का दिलासा तो दे रही है मगर वह दिलासा शिक्षा मित्र को सन्तोष नही दे पा रहा है। एक एक कर शिक्षा मित्र काल के गाल में समा रहे है और कोई भी जिम्मेदार पद पर रहने वाले लोग मौत के बाद दो मिनट के लिए कुछ शब्दो से शोक भी नही प्रकट कर रहा है।ऐसे में शिक्षा मित्र निराश व हताश होकर आये दिन काल का शिकार हो रहे है।
इस सन्दर्भ मे शिक्षा मित्र रवि दुबे ने बताया कि स्वयं प्रधानमंत्री ने वाराणसी में शिक्षा मित्र को आश्वस्त किया था कि शिक्षा मित्रो की जिम्मेदारी मेरी है।उन्हे न्यायोचित तरीके से सम्मान दिलाया जायेगा।

शिक्षा मित्र रमेश पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश मे जहरीली शराब पीकर मरने वालो को सरकार दो लाख रूपये दे रही है लेकिन सत्रह वर्ष स्कूल मे कठीन परिश्रम कर विद्यालय का ताला खोलने वाले शिक्षा मित्रो के मौत पर कोई शोक भी प्रकट करना मुनासिब नही समझ रहा है।आखिर शिक्षा मित्रो के साथ सौतेला व्यवहार क्यो? शिक्षा मित्र अखिलेश पाण्डेय ने बताया कि आखिर शिक्षा मित्र से सरकार को क्या प्रतिशोध है जो समझ से परे है।आखिर शिक्षा मित्र की गलती क्या है।शिक्षा मित्र अंजनी पाण्डेय ने बताया कि आखिर शिक्षा मित्र नीति नियन्ता नही है उन्हे सरकार ने ही बीटीसी कराया जिसकी मंजूरी सम्बधित विभाग ने दिया तो आखिर शिक्षा मित्रो का दोष क्या है।शिक्षा मित्र को उन्हें खोया सम्मान हर हाल मे प्राप्त होना चाहिए।

रिपोर्ट सुधीर सिंह

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