शिक्षा मंत्री ने किया प्रतिमा का अनावरण

0
134

शिवहर ब्यूरो : बिहार के शिवहर जिला स्थित श्री नवाब उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के परिसर में महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू नवाब सिंह उर्फ गोरा बाबू के प्रतिमा का अनावरण बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, डॉ० भीम राव अम्बेडकर विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ० अमरेन्द्र नारायण यादव,सांसद रमा देवी, विधायक मो.शर्फुद्दीन, पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुनाथ झा, बेलसंड विधायक प्रतिनिधि राणा रंधीर सिंह चौहान, पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर राणा, कांग्रेस नेता ठाकुर पद्माकर समेत कई ने प्रतिमाह का अनावरण किया गया। जिन्होंने शिवहर में शिक्षा का अलख जगाया आैर 27 एकड़ जमीन खरीद कर ठाकुर नवाब सिंह हाई स्कूल नीव 1934 में रखी थी।जो बच्चों को उच्च शिक्षा मिले। जिसमें भारतीय संस्कृति का मेल हो आैर पढ़ाई की पूरी व्यवस्था हो। वहीं कार्यक्रम के दौरान बाबू नवाब सिंह के जीवन एवं स्वतंत्रता आंदोलन का परिचय व इतिहासों के बारे में छपी किताब का लोकार्पण किया गया। इस किताब के मुख्य परिचयकर्ता उनके पौत्र ठाकुर रत्नाकर राणा एवं ठाकुर पद्माकर ने किया। बाबू नवाब सिंह उर्फ गोरा बाबू का जन्म 1867 ई. में शिवहर के महुअरिया गांव में हुआ था।इनके पिता का नाम भीखन सिंह था।उनके पिता की मृत्यू उनके जन्म से पहले हो गयी थी।दादा बाबू विश्वनाथ सिंह ने इनका पालन पोषण किया।गोरा बाबू धोती, गुजराती कुर्ता पहनते और माथे पर राजस्थानी पगड़ी बांधते थे। वह सदा प्रसंन्न रहते थे।उनकी दिव्यता, सचित्रता, शालीनता की गूंज केवल शिवहर में ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर, सीतामढी एवं पूर्वी चम्पारण के हर क्षेत्र में होती थी। नवाब सिंह राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ कर प्रांतीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। जब गांधी जी चम्पारण आये तब नवाब सिंह ने उनको काफी सहयोग किया था। जिसके बाद चंपारण, सीतामढी में नवाब सिंह के जुझारू नेतृत्व में आंदोलन का कार्य चलने लगा।इसी बीच नवाब सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जब गांधी जी शिवहर आये थे तो इन्हीं के मकान में ठहरे थे। 1928 को सरदार बल्लब भाई पटेल यहां आये थे।राजनितिक सम्मेलन किया और पटेल ने ठाकुर साहेब के स्वराज आश्रम में ही अपनी रात गुजरी थी। वर्ष 1930 मे पंडित जवाहर लाल नेहरु सीतामढी आये तो ठाकुर साहेब के द्धारा निर्मित स्वराज आश्रम में ही विश्राम किया था।

 
वर्ष 1930 में नवाब सिंह को नमक बनाने के जुर्म में अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं 1931 में सरकारी दमन तेज होने लगा तब अंग्रेजी हुकूमत ने नवाब सिंह के मुख्य कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।जिसमें उनके पुत्र रामनंदन सिंह भी शामिल थे।नवाब सिंह को छह माह और रामनंदन सिंह को डेढ़ साल की सजा हुई थी। गोरा बाबू न सिर्फ स्वतंत्रता सेनानियों अपितु स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के चिंतन और महाप्रबंधक भी थे।13 अप्रैल 1931 को शिवहर में हुए नमक सत्याग्रह के लिए आंदोलन किए थे। जिसमें उन्होंने कहा था कि अज्ञानी गुलामी मे भी सुख का अनुभव करते हैं आैर अपने अधिकारों और कर्तव्य के लिए स्वतंत्र विचार नहीं रखते तथा अमानवीय कृतियों के प्रति भी समझौतावादी बने रहते हैं। शिवहर छोड़ने के तीन माह बाद 4 दिसंबर 1942 को पूर्वी चम्पारण के खोरीपाकर गांव में ही 75 वर्षीय आयु में चल बसे।उनका वहीं के लोगो ने गुप्प चुप तरीके से बागमती बकेया नदी के संगम पर संस्कार कर दिया।अंग्रेज लोग इनके जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए इनाम घोषित कर रखा था।

रिपोर्ट – गणेश कुमार 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here