14 जुलाई को केजरीवाल सरकार के भविष्य का फैसला, चुनाव आयोग ने सुनवाई के लिए बुलाया |

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लाभ के पद मामले में विवादों में घिरी केजरीवाल सरकार के 21 विधायकों को चुनाव आयोग ने 14 जुलाई को सुनवाई के लिए बुलाया है, जिसके बाद चुनाव आयोग राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा |

केजरीवाल सरकार ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है, और विधायकों को विधायिका से अलग करता है | संविधान के अनुसार विधायिका के कुल सदस्यों के केवल 10 प्रतिशत को ही मंत्री या संसदीय सचिव बनाया जा सकता है |

केजरीवाल सरकार ने शुरुआत से ही संविधान का पालन नहीं किया, दिल्ली सरकार में केजरीवाल के अलावां 6 अन्य को मंत्री पद दिया गया साथ ही केजरीवाल ने एक विधायक को अपना संसदीय सचिव नियुक्त कर लिया, केजरीवाल सरकार यहीं नहीं रुकी उन्होंने 21 विधायकों को 6 अन्य मंत्रियों का संसदीय सचिव नियुक्त कर दिया |

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याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल की याचिका पर यह मुद्दा राष्ट्रपति के समक्ष पहुंचा तो राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से राय मांगी | राष्ट्रपति के आदेश चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर केजरीवाल सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जिसके जवाब में केजरीवाल सरकार ने चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कि चुनाव आयोग को राष्ट्रपति को सलाह देने का संवैधानिक अधिकार नहीं है |

याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल ने आयोग को बताया कि राष्ट्रपति को आयोग से सलाह लेने और आयोग को मामले की पड़ताल कर राष्ट्रपति को सलाह देने का संवैधानिक अधिकार और प्रावधान दोनों है |

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