क्या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा लोक तंत्र में बीघापुर नगर पंचायत का चुनाव???

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बीघापुर/उन्नाव(ब्यूरो)- नगर निकाय चुनाव के लिए बीघापुर में मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 5 मई से 15 मई 2017 तक शासन के आदेशानुसार चल रहा है।इस बीच जब मतदाता सूची नगर पंचायत कार्यालय में चस्पा की गई और लोगों ने उसे देखा तो मतदाताओं के होश उड़ गए।एक-एक वार्ड से कई परिवारों के नाम ही मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं, जो नगर पंचायत के मूल निवासी हैं।लोगों का आरोप है कि यह सब किसी सोची समझी शाजिश के तहत कराया गया है।

वर्ष 2012 में सम्पन्न हुए नगर निकाय चुनाव में नगर पंचायत में 6212 मतदाता थे वहीं 2017 में जो मतदाता सूची दर्शाई गई उसमें घटा कर मतदाताओं की संख्या 4116 कर दी गई, अर्थात 2096 मतदाता सूची से हटा दिए गए।

वार्ड नं0 1 गांधी नगर में वर्ष 2012 में 527 मतदता थे जो 2017 की सूची में 393 कर दिए गए, वार्ड 2 नागेश्वर नगर में 681 से घटा कर 479, वार्ड 3 शास्त्री नगर में 701 से घटा कर 443, वार्ड 4 संदोही नगर में 689 से घटा कर 391, वार्ड 5 आजाद नगर में 504 से घटा कर 387, वार्ड 6 अम्बेडकर नगर में 628 से घटा कर 351, वार्ड 7 गोदावलेश्वर नगर में 525 से घटा कर 438, वार्ड 8 तिलक नगर में 633 से घटा कर 440, वार्ड 9 शंकर नगर में 674 से घटा कर 456 तथा वार्ड नं. 10 पटेल नगर में 660 से घटा कर 338 मतदाता कर दिए गए हैं।जो कि शासन के मानक को भी अनदेखा कर किया गया है।

मानक के अनुसार आबादी के अनुपात में 20 प्रतिषत मतदाता बढ़ने चाहिए।नगर पंचायत निवासियों का कहना है कि कुछ कस्बे के ही षड़यंत्रकारियों ने मानकों की भी धज्जियां उड़ा दीं और जानबूझ कर कुछ परिवारों को मतदाता सूची से हटाया गया है।

इस सम्बन्ध में नगर के अजय पटेल व बाबू सिंह एडवोकेट आदि ने जिला निर्वाचन अधिकारी व प्रदेश निर्वाचन आयुक्त को शिकायती पत्र भी फैक्स द्वारा भेजा है। अब सवाल यह उठते हैं कि क्या 5 वर्षों बाद बीघापुर नगर पंचायत में किसी भी व्यक्ति ने मतदान के लिए 18 वर्श की आयु सीमा तय ही नहीं की?

क्या इन 5 वर्षों में बीघापुर के लोगों की आयु स्थिर कर दी गई थी? क्या इन 5 वर्षों में 2096 मतदाताओं का स्वर्गवास हो गया? अथवा 2096 मतदाता इन 5 वर्षों में बीघापुर से पलायन कर गए? यदि ऐसा हुआ तो यह भी शासन के लिए चिन्ता का विषय होना चाहिए था।

इसकी जांच होनी चाहिए थी कि 5 वर्षों में बीघापुर में एक भी मतदाता बढ़ने की अपेक्षा 2096 मतदाता घट गए। तो आखिर ये इतनी बड़ी संख्या में गए कहां? वहीं पुनरीक्षण में लगाए गए बीएलओ के रूप में दो वार्डों के कर्मचारी अरविन्द पाण्डेय व सुषील गुप्ता 5 मई से 13 मई तक लगातार गायब भी रहे जबकि अंतिम तिथि भी 15 मई है।ये दो कर्मचारी उन दो वार्डों के बीएलओ हैं जिनमें सबसे अधिक मतदाता सूची से बाहर किये गए हैं।

लोगों का आरोप है कि यह भी सब षड़यंत्रकारियों की ही साजिश के तहत हो रहा है। अब देखना होगा कि इस पर कोई कार्यवाही हेाती है अथवा भ्रष्टाचार की भेंट लोक तंत्र यह चुनाव चढ़ जाएगा।

रिपोर्ट-मनोज सिंह

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