श्रीमद भागवत कथा के अन्तिम दिन का समापन

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मऊरानीपुर(झाँसी )-ग्राम खिलारा मे आयोजित श्रीमद भागवत कथा के अन्तिम दिन के समापन सत्र की बेला के अवसर पर भगवताचार्य पं0 हरिशंकर अडजरिया (गलान) ने श्रोताओं को कृष्ण ,सुदामा की मैत्री की नवोदित व्याख्या करते हुए कहा कि सुदामा अपने मित्र के पास इस लिए नही जाना चाहते थे कि मांगने से ब्राहमण भेष का अनादर हेाता है। वास्तव मे ब्राहमण तो वों है। जो परमपिता परमेश्वर की अनुकम्पा से प्राप्त है। उसी मे सन्तोषी व्यक्त करते हुऐं अपने ग्रहस्थ आश्रम का परिपालन सही ढंग से संपोषित कर सके। ब्राम्हण समाज से कम से कम लेकर ज्यादा से ज्यादा उसे तुष्टि के रूप मे दें। इस परिभाषा को ब्राहमात्व के रूप मे दिखाया जाना ही बास्तव मे सुदामा के जीवन का उददेश्य है। वहीं दूसरी ओर भगवान कृष्ण के रूप मे उन्होने उस मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत किया जो सभी समृद्धियों के शिखर के होने पर भी मित्र के आने पर द्वारिका धीश ने अपने आसन पर आसीन कर अपने अश्रुओं से ब्राम्हण रूपी सुदामा के पैरों का प्रक्षालन कर अपने आप को धन्य किया। वास्तव मे वक्ता ने मार्मिक प्रतिपादन कर समस्त श्रोताओं को मैत्री , भक्ती उदित करने के रहस्य पूर्ण प्रस्तुति करने के उददेश्य को श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ का एक महत्वपूर्ण अंग माना है। इस दौरान यजमान राकेश द्विवेदी , शिवदयाल , केशव दिवेदी , सुरेन्द्र कुमार , सन्तोष दुवें , बल्लू महाराज , नीलेश , राजकुमार , रविशंकर , धर्मेन्द्र , भगवान दास दुबे , ओमप्रकाश , अकिंत , राजेन्द्र कुमार आदि मौजूद रहे। इसी प्रकार ग्राम धायपुरा स्थित श्री गौड बाबा मन्दिर पर चल रही संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा के पुराण प्रवक्ता पं0 महेन्द्र रावत (रहंक) ने अन्तिम दिन की कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए भगवान कृष्ण व सुदामा चरित्र का वर्णन किया। कथा उपरान्त व्यास पीठ का पूजन , हवन ,पं0 बालमुकुन्द मुखरिया ने वैदिक मंत्रों के साथ कराया । समापन अवसर पर भण्डारें मे धर्म प्रेम बन्धुओं ने बढ चढ कर भाग लिया। इस दोरान सुरेश चन्द्र गुप्ता , शीतल महाराज , राजू गुप्ता , महेन्द्र सिंह , आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट – रवि परिहार

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