मूर्तियों से कफन तक जीएसटी के दायरे में

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भदोही (ब्यूरो) जीएसटी के दायरे एवं दरों के विस्तार से भाजपा सरकार की करबोझ विस्तार की नीति ने जजिया कर की याद दिला दी है।देवी-देवता की मूर्तियों से कफन तक जीएसटी के दायरे में ले आना इसका साक्षात प्रमाण है | मूर्तियों पर कभी टैक्स नहीं था और बिना सिले कपड़े पर जीएसटी लगने से कफन तक भी उसके दायरे में आ गया है।उक्त बातें लोक दल के प्रवक्ता जयराम पाण्ड़ेय ने भदोही में आयोजित एक जन चौपाल में कही।उन्होंने आगे कहा कि

जीएसटी दरों का कृषि और बनारस के वस्त्रद्योग भदोही का कालीन उद्दोग सहित परंपरागत उद्यमों पर विपरीत असर होगा।
जयराम पाण्डेय ने एक वक्तव्य में कहा है कि किसान देशभर में उद्वेलित हैं और जीएसटी के स्वरूप से व्यापारियों को भी सरकार उसी ओर ढकेल रही है। उन्होने कहा कि जीएसटी की बेतुकी दरों के विरुद्ध लोकदल व्यापारियों एवं किसानों के साथ है। दरों के निर्धारण में तर्किकता नहीं है। लाभकारी मूल्य के अभाव में घाटे की खेती एवं कर्जबोझ तथा कर्जमाफी से सत्ता के इनकार के बीच मर रहे किसान की खेती की लागत बढ़ाते हुए रूटावेटर हल सहित उन तमाम कृषि उपकरणों पर 12% तक जीएसटी लगा दिया है जो कर दायरे में नहीं थे,जबकि सोने पर से कर घटा दिया गया है ।

ये कैसी सोच है कि खाने के बिस्कुट पर तो टैक्स बढ़ा दिया और सोने के बिस्कुट पर टैक्स घट गया। गरीब के बच्चे खेलकूद से नौकरियां पाते थे और अब खेलकूद उपकरणों पर अधिकतम सीमा वाली टैक्स दरें उसके लिए बाधा दौड़ बन जायेंगी। लोकदल ऐसे असंगत टैक्स ढांचे के विरुद्ध हर संघर्ष में आम व्यापारी, किसान और गरीब के साथ खड़ी रहेगी।

रिपोर्ट-राजमणि पाण्ड़ेय

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