पूर्व मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड के मामले में पूर्व विधायक विजय सिंह ने सोमवार को किया आत्मसमर्पण

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लखनऊ ब्यूरो : भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड के मामले में लखनऊ की सत्र अदालत से दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक विजय सिंह ने सोमवार को प्रभारी अपर सत्र न्यायाधीश पद्माकर मणि त्रिपाठी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। आरोपी विजय सिंह दिन में करीब 12 बजे अदालत में हाजिर हुए। अपर सत्र न्यायाधीश ने उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेजे जाने का आदेश दिया। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने गत 26 मई को विजय की जमानत अपील खारिज कर दी थी

विजय सिंह की ओर से दो अन्य प्रार्थना-पत्र अदालत में दिए गए, जिनमें उच्च श्रेणी की सुविधाएं दिए जाने एवं उन्हें चिकित्सीय सुविधा दिए जाने की मांग की गई थी। अदालत ने इन दोनों अर्जियों पर आदेश देते हुए कहा है कि जेल अधीक्षक नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें। ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्या कांड के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कलीम उल्लाह खान ने 17 जुलाई 2003 को विजय एवं संजीव माहेश्वरी उर्फ डॉक्टर उर्फ जीवा को सामान्य उद्देश्य से हत्या एवं हत्या के प्रयास का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी

यह था घटनाक्रम इस मामले की रिपोर्ट ब्रह्म दत्त द्विवेदी के भतीजे सुधांशु दत्त द्विवेदी ने 10 फरवरी 1997 को कोतवाली फर्रुखाबाद में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में लिखा था घटना वाली रात को वादी एवं उसके परिवार के सदस्य तथा चाचा ब्रह्मदत्त द्विवेदी एक तिलक समारोह से लौट रहे थे। ब्रह्म दत्त द्विवेदी के साथ उनका गनर बृज किशोर तिवारी तथा ड्राइवर शेर सिंह उर्फ ङ्क्षरकू भी था। तभी तीन-चार साथियों संग विजय सिंह उनपर असलहों से फायर कर दिया, जिसमें ब्रह्म दत्त एवं गनर की मृत्यु हो गयी थी तथा ड्राइवर घायल हो गया था। विवेचना के बाद विजय सिंह, रमेश ठाकुर, बलविन्दर कुमार उर्फ बिल्लू उर्फ वकील उर्फ पंडित तथा संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा उर्फ डाक्टर पर ब्रह्मदत्त द्विवेदी एवं बृज किशोर तिवारी की हत्या का आरोप लगाया गया। जबकि, उर्मिला राजपूत, पंचशील राजपूत, शिव प्रताप सिंह तथा पंकज मिश्रा पर घटना के षड्यंत्र का आरोप पाया गया। इसके अलावा आरोपी पंकज मिश्रा पर विजय सिंह एवं संजीव माहेश्वरी को घटना के बाद पनाह देने का आरोप लगाया गया था। सत्र अदालत ने विजय सिंह एवं संजीव माहेश्वरी के अलावा अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव एवं संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था

रिपोर्ट – मिंटू शर्मा

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