नहीं रहे मौरावां पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष भगोले महराज

0
87

उन्नाव ब्यूरो : मौरावां नगर पंचायत पूर्व अध्यछ की लंबी बीमारी के दौरान लखनऊ के एक अस्पताल में निधन हो गया।जिसकी खबर सुनते ही क़स्बा सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी।देखते ही देखते नगर पंचायत अध्यछ के आवास पर शुभचिंतको का जमावड़ा लग गया वहीं सहानुभूति के कारण कस्बे के व्यापारियों ने काम-काज ठप कर दुकानें भी बंद रखी ।
मौरावां कस्बे में आजादी के पूर्व 1946 में जन्में कृष्ण दत्त शुक्ला(के. डी. शुक्ला)उर्फ़ भगोले महराज गंभीर बीमारी के कारण पीजीआई लखनऊ में एक माह से भर्ती चल रहे थे। अचानक मंगलवार सुबह सात बजे पीजीआई अस्पताल में भगोले महराज का निधन हो गया। निधन की सूचना मिलते ही क़स्बे सहित पूरे क्षेत्र शोक की लहर दौड़ गयी।

 

कस्बे के व्यापारियों ने भी दुकाने बंद कर काम-काज ठप रक्खा।देखते ही देखते नगर पंचायत अध्यछ नवनीत शुक्ला के आवास पर शुभ चिंतको का जमावड़ा लगने लगा। भगोले महराज का अंतिम संस्कार देर साम बक्सर घाट पर किया गया।

बताते चले कि केडी शुक्ला उर्फ़ भगोले महराज का प्रारंम्भिक जीवन गरीबी एवं संघर्ष के बीच बीता उसके बाद भी समस्याओं और संघर्ष से लड़ते हुए भगोले महराज ने अपने परिवार को संभाले रखा और एकजुटता के बंधन में बांधे भी रखा। भगोले महराज मौरावां कस्बे के हिन्दू जनमानस के संरक्षक भी बने वही क्षेत्र के ब्राम्हणों के नेता भी रहे। सन 1989 ब्रिक फील्ड मालिक विवेक सेठ के पिता राजामुनवा को हराकर मौरावां नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज हुए थे, तब से लगातार बड़े कुटिनीतिज्ञ माने जाने वाले भगोले महराज के ही वर्चस्व एवं नीति के कारण ही 1994 में अपनी भाभी चंद्रकली शुक्ला, 2001से 2012 तक पत्नी शियावती शुक्ला और फिर 2012 से अब तक अपने पुत्र नवनीत शुक्ला(नीतू)को नगर पंचायत अध्यछ बनाये रखा ।

 

भगोले महराज ने विधान सभा चुनाव में भी अच्छी खासी दमदारी दिखायी और चुनावी समीकरण को भी सदैव अपने ही हिसाब से बनायें रखा । भगोले महराज ने पुरवा विधान सभा चुनाव 1991 में पहली बार लड़ा जिसमें जनता पार्टी से रहे ह्रदय नारायण दीक्षित 21513 मत पाकर विजयी हुए थे और बीजेपी से चुनाव लड़े भगोले महराज 20374 मत पाकर उपविजेता की भूमिका में रहें और मात्र 1139 मतो से हार का मुहँ देखना पड़ा था । फिर दूसरा चुनाव भी भगोले महराज ने 1993 में बीजेपी से लड़ा जिसमें 37653 मत पाकर उपविजेता रहे और ह्रदय नारायण दीक्षित ने सपा से 43963 मत पाकर जीत हासिल की।

 

भगोले महराज की संघर्ष की यात्रा राजनैतिक जीवन में यहीं नही रुकी और फिर तीसरी बार 2002 में बसपा से जुगाड़ लगाकर चुनाव लड़े और 31615 मत पाकर चुनावी समीकरण को बदला जिसके परिणाम स्वरुप उदयराज यादव 48831 मत पाकर पुरवा के विधायक बनें। हर पार्टी में पहुँच और टिकट लाने में सक्षम कहे जाने वाले भगोले महराज 2007 में कांग्रेस से टिकट लाकर चुनाव लड़ा जिसके कारण ही उदयराज यादव पुनः विधायक बने ऐसा समीकरण के हिसाब से लोग मानते है। भगोले महराज की परिवारिक जिम्मेदारी एवं संघर्ष के चलते शिक्षा तो अच्छी नही रही उसके बावजूद में क्षेत्र के लोगो को पेचीदे एवं बड़े मामलो में आसानी से बाहर निकालने का हुनर रखते थे।एक मास्टर माइंड एवं वकील को भी अपनी राजनैतिक-कुटिनीतिक दिमाग से मात देने वाले माने जाते थे।
परिवारिक पृष्ठ भूमि में नजर डाले तो भोगोले महराज 6 भाई बहनों में गणेश दत्त(धुन्ना), सुरेश दत्त(बग्गड़), रानी, कृष्णदत्त(भगोले महराज), विष्णु दत्त एवं गुड्डी जो अपने पिता देवदत्त शुक्ला की चौथे नंबर की संतान थे । भगोले महराज की पांच संतानों में मोहित शुक्ला, कांती, रोहित शुक्ला, नवनीत शुक्ला, अमित शुक्ला है जिसमें नवनीत शुक्ला मौरावां नगर पंचायत अध्यक्ष है।वहीं क्षेत्र सहित जनपद में महराज के नाम से प्रसिद्ध एवं जाने जाने वाले महराज को क्षेत्र के लोगो ने एक वीर शेर अपने बीच से चला गया कह कर आँखे नम की। वहीं बक्सर घाट तक भी चहेतो का भारी-भरकम काफिला रहा।

रिपोर्ट –  बृजेश शुक्ला 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY