बलिया में इलाज के नाम पर मरीजों का शोषण

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बलिया (ब्यूरो)- टीबी के मरीजो के लिए जहां सरकार डाट्स कार्यक्रम चला कर नि:शुल्क जांच व दवा मुहैया करा रही है, वहीं नगरा बाजार मे संचालित एक प्राइवेट चिकित्सालय टीबी के इलाज के नाम पर मरीजो का जी भर के शोषण कर रहा है।

आश्चर्य तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग का इस हास्पीटल पर कोई नियंत्रण नही है। किसकी अनुमति से यह हॉस्पिटल टीबी के मरीजो का उपचार कर रहा है, यह भी स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियो को पता नही है। यह हॉस्पिटल सरकार के डाट्स कार्यक्रम को मुंह चिढा रहा है।

इस हॉस्पिटल मे टीबी के मरीज अपना इलाज कराने के लिए काफी दूर दूर से आते हैं। बलिया, आजमगढ, मऊ, गाजीपुर सहित अन्य जनपदो के मरीजो का यहां जमावडा होता है। अहम तो यह है कि इस चिकित्सालय मे मरीजो को बैठने तक की व्यवस्था नही है। मरीज फर्श पर ही बैठने को मजबूर होते है।

मरीजो को पीने के लिए स्वच्छ जल भी उपलब्ध नही है। टीबी इलाज के लिए मशहूर इस हॉस्पिटल मे एक्सरे के नाम पर भी मरीजो का दोहन किया जाता है। मरीजो को केवल एक्सरे की फिल्म ही दी जाती है उसकी रिपोर्ट नही। मरीज को दवा की पर्ची भी नही दी जाती है। सभी दवाएं हॉस्पिटल से ही मिलती हैं।

एक हफ्ते की दवा की कीमत पांच सौ से एक हजार तक वसूल होती है। हॉस्पिटल मे कोई फर्मासिस्ट भी नही है। महिला एएनएम से दवा वितरण कराया जाता है। इस गर्मी के मौसम मे पर्याप्त पंखो की भी व्यवस्था नही है। उमस व गर्मी से मरीज हलकान होते हैं। सबसे आश्चर्य तो यह है कि इस चिकित्सालय मे चिकित्सको के रिटायरमेंट की उम्र की भी कोई सीमा नही है। 70- 75 वर्ष के डाक्टर भी इलाज कर रहे हैं।

मल, मूत्र , कफ आदि जांच के नाम पर भी भारी भरकम धनराशि ली जाती है। हॉस्पिटल मे कार्यरत कर्मचारियो के शोषण की शिकायत भी आम हो गई है।.

प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एसके गुप्त का कहना है कि उक्त प्राइवेट हॉस्पिटल द्वारा टीबी का इलाज किया जाना तो संज्ञान मे है। हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नही है।

टीबी इलाज के लिए उसे कहां से अनुमति मिली है यह भी पता नही है। रहा सवाल मरीजो के शोषण व दुर्व्यवस्था की तो उसकी जांच करा कर उच्चाधिकारियो के यहां रिपोर्ट भेजी जाएगी।

रिपोर्ट-सन्तोष कुमार शर्मा

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