पैलीमेटा क्षेत्र में चरमराई शिक्षा व्यवस्था

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पैलिमेटा/छत्तीसगढ़(राज्य ब्यूरो)- गर्मी छुट्टियों के बाद आज स्कूलो के पट खुले किन्तु अंचल के बच्चो को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए अपेक्षित प्रयास नही किए जा रहे है , उससे लगता है कि अगले शिक्षा सत्र में भी बच्चो को पुरानी समस्याओं से ही जूझना पडेगा । शासन द्वारा एक ओर स्कूलों को सर्वसुविधायुक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है । वहीं अंचल के स्कूलो का हाल यह है कि कही शिक्षकों का अभाव बना हुआ है , तो कहीं भवन ऐसे है कि कभी भरभरा कर ढह जाए । दुर्भाग्यजनक बात है कि यह स्थिति सालों से होने के बाद भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियो द्वारा उसे सुधारने का अपेक्षित प्रयास नहीं किया गया । जिसके चलते अंचल में संचालित स्कूलो में पढाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ती की जा रही है । जिससे बच्चो का भविष्य खराब हो रहा है । वही पालको में भी असंतोष पनपने लगा है । ग्रामीणों ने स्कूलो में सुविधा मुहैया कराने की मांग की है ।

40 साल पहले बने जर्जर खपरैल के छत वाले स्कूल में गंदगी के बीच पढाई को मजबूर है बच्चे

जानकारी के अनुसार छुईखदान ब्लाक के अधीन आने वाले ग्राम सिंगारपुर में संचालित प्राथमिक शाला भवन में चारो ओर गंदगी फैली रहती है । पिछले साल की तरह इस साल भी ऐसे ही स्थिति का सामना करना पडेगा । स्कूल के पास में गौठान है जहां एकत्रित होने वाले मवेशी स्कूल के इर्द गिर्द मंडराते रहते है । स्कूल के आसपास जहां यहां गंदगी होने से परिसर में मच्छर और कीडे भिन भिनाते रहते है । शाला में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना के तहत बच्चो को गंदे और दूषित वातावरण के बीच भोजन खाना पडता है । ऐसे स्थिति बारिश के दिनो ज्यादा होती है । यहाँ के बच्चे अक्सर बीमार रहते है । वातावरण देखते हुए गांव के कुछ बच्चे तो स्कूल आना भी पसंद नहीं करते । यह सिर्फ एक ही शिक्षक पदस्थ है ।

सिंगारपुर प्राथमिक शाला भवन लगभग 40 साल पहले बने शाला भवन में खपरैल लगे हुए है । यहां भवन काफी जर्जर हो चुका है । बारिश के दिनो में पानी अंदर भर जाता है । बाढ का पानी सकूल अंदर चले जाता है । अब तो हर एक रोज में क्षेत्र में बारिश हो रही है । ऐसे में स्कूली बच्चों को परेशानियों का सामना करना पडेगा । प्रशासन द्वारा नये भवन दूसरे स्थान पर सुविकृति दी है पर भवन निर्माण कार्य शुरू कर पंचायत ठेकेदार द्वारा सिर्फ कालम निकाल कर अधूरा छोड दिया गया है । ऐसा लगता है कि इस वर्ष भी यहां के स्कूली बच्चो को पुराने खंडहर भवन और गंदगी के बीच पढाई करना पडेगा । किचन भवन भी जर्जर है । झिरिया के प्राथमिक शाला स्कूल मे एक भी शिक्षक नही है जो शाला शिक्षक विहीन है पहले व्यवाथा में शिक्षक थे पर एक अप्रैल से शिक्षक अपने शाला चले गये यहा स्कूल कि पढाई भगवान भरोसे है । अंचल के अधिकाश स्कूलो में एक शिक्षक ही पदस्थ है । जिसमे प्राथमिक स्तर सिंगारपुर, गहिराटोला, डंडूटोला, अचानकपुर, मिडिल स्कूल देवरचा शिक्षको की कमी पैलीमेटा शासकीय हायर सेकेंड्री स्कूल मे भौतिक रसायन जीव विज्ञान अर्थ शास्त्र भूगोल वार्णिज्य इसी तरह मोहगांव , ठाकुरटोला के अधिकांश स्कूलो मे शिक्षको की कमी है ।

उच्च शिक्षा का अभाव पूरे अंचल में प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी तक के स्कूल संचालित है । यहाँ अलग बात है कि सभी कमियो से जूझ रहे है किन्तु क्षेत्र में एक भी कालेज नही होने से अंचल के हजारो बच्चे 12वी तक पढाई करने के बाद शिक्षा से दूर हो जाते है । कालेज पढने वही बच्चे जाते है जिनके परिजन आर्थिक रुप से सक्षम है । अंचल के लोगो ने यहा कालेज खोलने की मांग प्रशासन से की है ।

रिपोर्ट-हितेश मानिकपुरी/हरदीप छाबड़ा

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