आस्था के साथ खिलवाड़, वीरान हो गयी तपोभूमी : अवैध कब्ज़ा

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फतेहपुर चौरासी/उन्नाव(ब्यूरो)- विकासखंड के एक गांव में स्थित एक तपोभूमि वीरान पड़ी है । उपेक्षा के चलते यह स्थान अबैध कब्जेदारो के गिरफ्त में होते जा रहा है। कोई भी सन्त महात्मा उक्त स्थान पर भयवश नही रुकता है।

फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के विकास खण्ड के गांव दोस्तपुर शिवली में वर्षो पूर्व एक त्यागी बाबा कुटी के नाम से एक आश्रम हुआ करता था। जहाँ ७०वर्ष पहले अयोध्या धाम से एक महात्मा आये थे जिनका नाम रामसरन दास था ।

बुजुर्ग बताते है। यही पर सन १९४८में चालीस दिन की भूमि समाधी ली थी, बिना अन्न जल और बिना वायु के उसके बाद विशाल भंडारा करवाया, और एक मन्दिर का निर्माण भी करवाया, जिसमे हनुमानजी की मूर्ति की स्थापना भी करवाई, फिर महत्मा जी ने वस्त्रो को त्याग कर टाट पहनने लगे, इस लिये उनका नाम त्यागी बाबा पड़ गया था |

यह जानकारी महत्मा जी ने मुझे स्वयं दी थी, सन १९९१में उनके प्रिय शिष्य रामसेवक दास जी बताते है। गुरु जी ने कई बार जल समाधी भी ली थी, जन कल्याण के लिए जैसे कि अधिक बारिश होना या फिर शूखा पड़ जाने की स्थिति में जल समाधी लेते थे|

जब तक बारिश बन्द न हो जाय या फिर शूखे की स्थिति में जब तक पानी न बरसे तब तक अपनी समाधी नही तोड़ते थे, अंत मे मेघो को झुकना ही पड़ता था| बारिश अधिक होने के समय में बर्षा बन्द हो जाती थी, और शूखे के समय बारिश शुरू हो जाती थी|

ऐसे महान संत के ऊपर कुछ लोगो ने भयंकर आरोप भी लगाये लेकिन कुछ भी सिद्ध नही कर पाएं आरोप लगाने वाले लोग अस्तित्व हीन हो गये|

सन १९९२ जुलाई में महात्मा जी ने अपने आश्रम पर ही देह त्याग दी थी | सन १९९७ में एक शराबी नशे में होकर मन्दिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को तोड़ दिया था| ग्रामीणों के विरोध करने पर उस शराबी ने पुनः मूर्ति की स्थापना कराई, लेकिन फिर भी उस शराबी का सत्यानाश हो ही गया|

सन २००४ में उसके बाद कई महत्मा इस आश्रम पर आये, लेकिन कोई टिक नही सका, उसका कारण ये है की आने वाले सन्त तपस्या कम और ढोंग ज्यादा करते थे| इस लिए नही रुक पाये, क्योंकि इस आश्रम पर ढोंग पाखण्ड करने वाले का सत्यानाश हो जाता है। इसी कारण यहाँ कोई सन्त नही रहता, तपोभूमि वीरान पड़ीं है।

रिपोर्ट-रामजी गुप्ता 

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