फराज को याद थी कुरान की आयतें चाहता तो बचा सकता था अपनी जान लेकिन तारिषी जैन और अंबिता की दोस्ती पर हो गया कुर्बान

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फ़राज़ हुसैन और तरिषी जैन (फोटो क्रेडिट-ibnlive.com)
फ़राज़ हुसैन और तरिषी जैन (फोटो क्रेडिट-ibnlive.com)

दिल्ली- ढाका में बीते शुक्रवार की रात में हुए आतंकी हमले में एक हिंदुस्तानी लड़की तारिषी जैन भी आतंकियों के वहशीपन का शिकार हो गयी | पूरे भारत में जैसे ही यह खबर आई कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आतंकी हमला हुआ है पूरे देश में आतंक का माहौल छा गया था लेकिन उस समय पूरा देश शोक के सागर में डूब गया जब लोगों को यह पता चला कि एक 19 वर्षीय मासूम बच्ची तारिषी जैन को आतंकियों ने गला रेत कर मार दिया है |

दोस्ती और इंशानियत की नई मिसाल रच गए फ़राज़ हुसैन –
आपको यह जानकर बेहद गर्व महशूस होगा कि आज भी दोस्ती और मोहब्बत लोगों के ह्रदय में जिन्दा है और वे इसके लिए अपनी जान भी दे सकते है | आज भी दोस्ती कभी न ही कोई मज़हब देखती है और न ही कोई धर्म, इस दोस्ती में वह जादू है कि वह बड़े से बड़े खतरे के सामने भी दोस्ती का दामन नहीं छोडती है | दरअसल आपको यह बता दें कि ढाका के जिस रेस्टोरेंट में तारिषी जैन अपनी एक अन्य साथी अम्बिता के साथ खाना खाने के लिए गयी थी वही इन दोनों ही दोस्तों के साथ फराज हुसैन नाम का एक और मुस्लिम लड़का था जो इनका बेहद करीबी दोस्त था और यह तीनों बच्चे एक साथ ही कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे |

जिस समय आतंकियों ने ढाका के रेस्टोरेंट पर हमला किया था फ़राज़ हुसैन भी अपनी दोस्तों के साथ वही खड़े थे | आतंकियों ने जब फ़राज़ से वहां से जाने के लिए कहा तो फ़राज़ ने वहां से जाने से यह कहते हुए मना कर दिया कि वे अपनी दोस्तों को छोड़कर कही जाने वाले नहीं है चाहे कुछ भी हो जाए | वे जायेंगे तो अपनी दोस्तों को अपने साथ लेकर जायेंगे |

उसके बाद आतंकियों ने बेहद निर्ममता के साथ इन मासूम बच्चों के सामने एक-एक करके गैर मुस्लिमों को मारना शुरू कर दिया | आतंकी वहां मौजूद सभी लोगों से यह पूछ रहे थे वे उन्हें कुरान की आयतें सुनाये जो आयतें सुना ले जा रहे थे आतंकी उन्हें छोड़ दे रहे थे और बाहर जाने की इज़ाज़त दे रहे थे लेकिन जो मुस्लिम नहीं थे और जिन्हें कुरान की आयतें नहीं आ रही थी वे उन्हें बेहद बर्बरता से गला रेत कर मार रहे थे |

फराज हुसैन ने अपनी दोनों दोस्तों के साथ खड़े होकर यह सब देखा और जब आतंकियों ने उससे वहां से जाने के लिए कहा तो उसने साफ़ मना कर दिया और कहा कि वह जाएगा तो अपनी दोस्तों के साथ जाएगा नहीं तो वह नहीं जाएगा | फराज को कुरान की आयतें याद थी वह चाहता तो वहां से चला जाता लेकिन उसने अपनी जिंदगी से ज्यादा अपनी दोस्ती को महत्त्व दी और वह वहां से टस से मस नहीं हुआ |

जिसके बाद आतंकियों ने तारिषी जैन को और उसके बाद उसकी अन्य दोस्त अंबिका और सबसे आखिरी में आतंकियों ने फ़राज़ हुसैन को भी बेहद बेरहमी के साथ गला रेतकर मार दिया |

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