CM को राजनीति से फुर्सत नहीं किसान मर रहे है भूख से, यू.पी. में एक और किसान की भूख से तड़प कर मौत

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हे भगवान् ये कैसी विडंबना है जिस देश में अपने द्वारे खड़े हर भूखे को पहले भोजन करवाने की प्रथा रही हो, जिस देश के किसान अपनी थाली के भोजन का कुछ हिस्सा अपने बैलों को खिलाने के बाद भोजन करने में भरोषा रखते हो उस देश के किसान आज भूख से मर रहे है | यह कैसी विडम्बना है इस देश की और आखिर इसका जिम्मेदार कौन है | देश और राज्य की सरकारें ? या फिर हम और आप स्वयं ? आखिर ये स्थित पैदा ही कैसे हो गयी ? जिस देश में हर तरह का मौसम हो ? जिस देश में चारों तरफ नदियाँ, तालाब और झरने हो, जहां हर मौसम में कभी खेतों में फसलें लहलहाती रही हों उस देश में आज किसान भुखमरी से मर रहे है ? है न आश्चर्य की बात ? सोचने वाली बात यह है कि इसका जिम्मेदार कौन है ? सरकारें या हम खुद ?

मीडिया में आई ख़बरों से पता चला है कि ललितपुर में एक 40 वर्षीय किसान सुखलाल की भूख से मौत हो गयी है ? बताया जा रहा है कि सुखलाल को 2 महीनों से खाने का राशन जो सरकार के द्वारा दिया जाता है गरीब किसानों को भरण पोषण के लिए वह नहीं मिला था | परिजनों का दावा है कि सुखलाल ने पिछले 2 दिनों से कुछ भी नहीं खाया था और भूख के कारण से ही सुखलाल की मौत हो गयी है |

हर महीने गरीब किसानों को जीवित रहने के लिए जो अनाज दिया जाता है आखिर वो गया कहाँ ?
गाँव में कोटेदारों के माध्यम से सरकार हर महीने गरीब किसानों को रौशनी के लिए मिटटी का तेल, चीनी और राशन देती है जो सब्सिडी के साथ गाँव के उन गरीब किसानों के लिए होता है जिनके पास जमीनें नहीं होती है | जो एक विशेष कार्ड के धारक होते है | लेकिन ललितपुर जिले के किसान सुखलाल को बताया जा रहा है कि पिछले 2 महीनों से राशन का एक भी दाना नहीं मिला था | जिसकी वजह से उसके घर में पिछले 2 दिनों से चूल्हा तक नहीं नहीं जला था यही कारण था कि किसान की मौत हो गयी | यहाँ पर सवाल उठता है कि आखिर वो अनाज जो सरकारें किसानों के लिए बँटवाती है वो जाता कहा है ? अक्सर जब इसकी जांच की गयी है तो पता चलता है कि सरकारी अधिकारीयों से लेकर नेता, और रसूक दार लोग मिलकर ये पूरा का पूरा अनाज खा जाते है, जिसे यह भी कहा जाता है कि ब्लैक कर लिया गया है | ऐसे में चंद पैसों की खातिर किसानों की जान चली जाती है |

यूएन की एक रिपोर्ट का दावा भारत में है सबसे ज्यादा भुखमरी के शिकार लोग –
यूनाइटेड नेशन की हंगर (2015) रिपोर्ट ने दावा किया है कि दुनिया में भुखमरी और कुपोषण के शिकार लोग सबसे ज्यादा भारत वर्ष में ही है | बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स (2015) में दावा किया गया है कि भारत के करीब 19 करोंड लोगों को पौष्टिक भोजन नहीं मिलता है | साथ ही यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत में 41 करोंड लोग आज भी ऐसे है जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने पर विवश है | हम आपको बताते है कि यह तो यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट है जो केवल कागज़ पर ही है अगर हम इनकी पड़ताल करना प्रारंभ करें तो शायद हिन्दुस्तान की कहानी कुछ और ही निकलेगी | यहाँ रसूकदार लोग तो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे होते है और ग़रीब किसान और मजदूर जिनकी सुनने वाला कोई नहीं होता है वे गरीबी रेखा से ऊपर होते है |

एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत में कुपोषण इतनी अधिक संख्या में फैला हुआ कि देश में 5 साल से कम उम्र के तकरीबन 40% बच्चों का वजन सामान्य से कम होता है | वही हेल्पएज इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि इस कृषि प्रधान देश भारत में हर दिन तक़रीबन 5 करोंड बुजुर्गों को भूखे पेट सोना पड़ता है | वही एक दुसरे आकंडे की मानें तो देश में हर दिन 19 करोंड लोग भूखे पेट सोने को मजबूर है |

यह है हिन्दुस्तान का सच, पूर्व की सरकारें दावा करती रहती है कि उन्होंने 1947 से लेकर आजतक देश का उत्थान करने में अपना सबकुछ लुटा दिया है लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी देश में लोग भुखमरी से मर रहे है | इन सरकारों का काला सच यह है कि इन सरकारों ने देश की पूरी आबादी को ठीक तरह से रोटी,कपडा और मकान भी न दे सकीं है | इन्होने न ही इसे दिया और न ही इसे बनाने या फिर कमाने का हुनर ही जनता को दिया | अगर इन्होने कुछ दिया है तो वह है हर 5 साल में एक बार आशा और बाकी के पूरे 5 साल निराशा और केवल निराशा |

धन्यवाद !

धर्मेन्द्र सिंह

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