फसलों को बर्बाद कर रहे आवारा जानवर, किसानों को नहीं सूझ रहा कोई उपाय

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बीघापुर (उन्नाव ब्यूरो) : पाप और पुण्य के असमंजस में क्षेत्रीय किसान परेशान हैं । क्षेत्र में एक पुरानी कहावत है गुड़ का भरा हंशिया न खात बनत न उगिलत। लगभग यही हाल इस समय किसानों का है।बात है क्षेत्र में बेसहारा घूम रहे जानवरों की, इन जानवरों ने किसान की रातों की नींद दिन का चैन हराम कर रखा है। इस समय रात रात भर जागकर किसान खेतों की रखवाली कर रहा है, मौका मिलते ही फिर भी यह जानवर खेतों में टूट पड़ते हैं, और खाने के साथ साथ पैरों से भी फसल बर्बाद करते हैं, इन बेसहारा आवारा जानवरों का जिम्मेदार भी कहीं न कहीं किसान ही है पर किसी को भी इन जानवरों से निजात मिलने का विकल्प नजर नहीं आ रहा है, वहीं कुछ किसानों ने अपने खेत की फसल को इन जानवरों से बचाने के लिए खेत के चारों तरफ कटीले तारों को बाँध रखा है जिससे फसल नुकसान होने से तो बच रही है पर इन निरीह जानवरों की हालत खराब है जो भी जानवर तार लगे खेतों के पास जाता है वह तारों में फंस जाता है जिससे उनका शरीर जगह जगह कट फट जाता है और कटे जगह में जानवरों के कीड़े पड़ रहे हैं, जो बहुत ही भयानक और दर्दनाक मंजर देखने में नजर आता है इन जानवरो का ह्रदयविदारक दृश्य देखकर लोग कहते हैं | इस तरह तड़प तड़प कर जीने से तो अच्छा है भगवान इन जानवरो को मौत दे दे जबकि इस भयानक दर्दनाक मंजर के वह किसान कही न कही स्वयं जिम्मेदार है बदले राजनैतिक परिदृश्य में जहां सरकार वैध अवैध बूचड़ खानो के खुलवाने बन्द करवाने में दिलचस्पी तो ले रही है पर इन बेसहारा जानवरो का सहारा बनने का कोई विकल्प नही खोज रही है इससे लगता है की दिनों दिन क्षेत्र में इन बेसहारा जानवरो की संख्या बढ़ती जायेगी और यह निरीह बेजुबान जानवर यू ही तड़प तड़प के मरते रहेगे धर्म की बड़ी बड़ी बाते करने वाले ठेकेदारो के पास भी इस समस्या का कोई समाधान नही सूझ पड़ रहा है इस समस्या के समाधान के लिए क्षेत्र के कुछ लोगो ने अपनी प्रतिक्रियाए दी हैं।

जिनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य अजीत सिंह बाबी का कहना है सरकार ब्लॉक स्तर पर गौशालाएं बनवाए, जो लोग गौशाला के लिए जमीन दान दें उन्हे टैक्स में छूट दी जाए,दुधारू गायों को लोग गौशालाओं से शुल्क देकर ले जाएँ और जब वे दूध देने बन्द कर दें तो उन्हें फिर गौशाला को सौंप जाएँ।बछड़ों का बन्ध्याकरण किया जाए साथ गौशाला से जो गौमूत्र आदि इकट्ठा हो उसको बेच कर आमदनी भी हो सकती है।पशु गोद लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाए।बंश बहादुर सिंह का कहना है कि आवारा गौवंशो के लिए सरकार कुछ निर्णय ग्राम सभा स्तर पर ले तो बेहतर हो सकते हैं हालात।

सर्वेश यादव का कहना है कि गाँवों में गौशालाएं बना कर उनसे प्राप्त गोबर, मूत्र , दूध आदि का व्यापार करने के लिये लोगों को प्रेरित किया जाये, जिससे लाभ भी होगा और समस्या का समाधान भी ।चंद्रजीत यादव का कहना है कि सरकार जिस तरह गरीबों को गैस सिलेंडर व अन्य योजनाएं दे रही है वैसे ही गरीबों को एक एक गाय भी देने का कार्य करे।दीपक शर्मा का कहना है कि पशुपालन को सरकार प्रोत्साहित करे, इसे रोजगार से जोड़ कर इसे कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करे,तो एक साथ कई समस्याओं जैसे बेरोजगारी यूवाओं का पलायन आदि को भी रोका जा सकता है।रासायनिक खाद की जगह गोबर की खाद और गौ मूत्र को सरकार किसानों से खरीदे तो समस्या का समाधान हो जाएगा।क्षेत्र के भोलू सिंह, राहुल यादव, दिलीप चौधरी, पंकज सिंह, राम जी यादव, अमित पाण्डेय आदि का भी यही कहना है कि सरकार गौशाला बनवा कर किसानों की समस्या का समाधान करे।

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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