धान लेकर भटक रहे धरती के भगवान व डीएपी खाद के लिए कतारों में लगें किसान

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लालगंज/रायबरेली (ब्यूरो)- सरकार व सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही और लेट लतीफी के कारण किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मामला लालगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत का है जहां सहकारी समिति ऐहार धान खरीद केन्द्र बना हुआ है।अभी तक खरीद केन्द्र पर पोस्टर लगा है व केवल बोरियां ही आयीं हैं। अभी खरीद का शुभारंभ नहीं हुआ है व किसान मायूस होकर लौट जाते हैं।

किसान यदि नजदीकी मंडी लालगंज जाते हैं तो उनको वहां से यह कहकर भगा दिया जाता है कि आप डलमऊ तहसील के अंर्तगत आते हैं इसलिए आपका धान खरीद नहीं किया जायेगा। वहीं योगी सरकार ने 1नवंबर 2018 से उत्तर प्रदेश के सभी खरीद समितियों पर भारी भरकम पोस्टर लगवा दिए हैं और आनन-फानन में धान का मूल्य भी घोषित कर दिया। धान का मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 1770 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लिखवाया गया जबकि पिछले 1 नवंबर से अभी तक किसी भी क्रय केंद्र पर किसानों के धान की तोल नहीं हुई जिसके चलते क्षेत्रीय किसान काफी परेशान है।क्षेत्रीय किसान अपने धान को लेकर दरदर भटकने पर मजबूर है।

किसान बिचौलियों के चंगुल में फंसकर अपनी धान औने-पौने कीमत में बेचने को मजबूर है। जबकि सरकार किसानों को लेकर बड़े-बड़े वायदे करती है। सही मायने में यदि कहा जाए तो जुमले वाली सरकार की नाकामी को साबित करने में अधिकारी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। एक तरफ किसानों की आय को दोगुनी करने का अभिनय किया जा रहा है तो दूसरी तरफ किसानों के हित के लिए कुछ भी नहीं हो पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ खाद की किल्लत स्थानीय किसानों को झेलनी पड़ रही है वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र की समितियों पर ताला लगा हुआ है। एक भी बोरी खाद इन पर वितरित नहीं की गई है।इसी का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले लोग सक्रिय रहे।

सरकार की नाकामी हर मौके पर उजागर हो रही है फिर चाहे आवारा पशुओं की बात की जाए या फिर कर्ज माफी की बात हो।साथ ही साथ फिर बात चाहे डीजल पेट्रोल की महंगाई को लेकर हो। भ्रष्टाचार जो कि पिछली सरकारों की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। कृषि उपज का केन्द्रों पर ना खरीदना किसानों की चिंता का कारण बना हुआ है। जिसके चलते बिचौलियों को हर मौके किसानों के शोषण करने के दिए जा रहे है। नहरों की सफाई हो चाहे किसानों के कृषि ऋण कार्ड की बात हो सब जगह पर किसान ठगे जा रहे हैं।

यह बेचारे बेबस लाचार किसान आखिर जाए तो कहां जाए। अंततोगत्वा किसान इन्हीं सब कष्टों की वजह से आत्महत्या के लिए मजबूर होते जा रहे हैं।इसके लिए जिम्मेदार वर्तमान सरकार ही है। किसानों में वर्तमान सरकार को लेकर भयंकर आक्रोश व्याप्त है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसानों ने सरकार को सबक सिखाने के लिए कमर कस ली है।

रिपोर्ट- अरुण कुमार पांडेय 

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