सूखा राहत योजना के तहत नहीं मिला किसानों को उनका हक

0
121

 

जालौन(ब्यूरो)- सूखा राहत के तहत पीड़ित किसानों के लिए शासन से प्राप्त धनराशि स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते पूरी वितरित नहीं हो सकी। जिसके चलते किसान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। आर्थिक सहायता के लिए प्राप्त धनराशि में अवशेष धनराशि को वापस लौटाए जाने का काम चल रहा है।

सूखे के कारण नष्ट हुई फसलों के मुआवजे के लिए तहसील क्षेत्र के 42 गांवों को चिन्हित कर पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता दिलाए जाने के लिए शासन की ओर से 9 करोड 9 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई थी। जिसमें स्थानीय प्रशासन ने सर्वे कराकर किसानों को चिन्हित किया और उनके बैंक खातों में धनराशि पहुंचाए जाने के लिए लेखपालों को निर्देश दिए गए। लेखपालों की लापरवाही के चलते किसानों के खातों में उनकी राहत धनराशि समय से नहीं मिल पहुंच सकी। 42 गांवों में से 6 गांव गैर आबाद होने से 36 गांवों के किसानों को धनराशि वितरित की जानी थी।

मुआवजे की धनराशि न मिलने पर क्षेत्रीय किसानों ने लेखपालों पर आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन भी किए। लेकिन स्थानीय प्रशासन मूक दर्शक बनकर तमाशा देखता रहा। स्थानीय प्रशासन व लेखपालों की लापरवाही के चलते शासन द्वारा भेजी गई 9 करोड 9 लाख रूपये की धनराशि के सापेक्ष स्थानीय प्रशासन 6 करोड़ 45 लाख रूपये ही वितरित कर सका है। इसमें 7 हजार 887 किसान ही लाभ ले सके। जब इस सदंर्भ में तहसीलदार सतीश कुमार वर्मा से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर किसानों को राहत राशि पहुंचाई गई है। जो किसान राहत राशि पाने से वंचित रह गए हैं, उनको भी 20 मार्च तक धनराशि पहुंचा दी जाएगी। इसके लिए लेखपालों को निर्देश दे दिए गए हैं कि शेष किसानों के बैंक खाता संख्या लेकर उनके खातों में धनराशि पहुंचा दी जाए।

रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव
हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY