गेहूँ क्रय केन्द्र खुले पर नही पहुँच रहे किसान, बाजार भाव से कम कीमत देने पर कम हो सकती है खरीद

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चाँदमारी (ब्यूरो)- शासन के निर्देशानुसार सभी सहकारी समितियों पर गेहूँ क्रय केन्द्र खोल दिये गये हैं | लेकिन अभी किसान गेहूँ बेचने केन्द्रों पर नही पहुँच रहे हैं। 1 अप्रैल से ही हरहुआ के सभी साधन सहकारी समितियों पर क्रय केन्द्र खोलकर सचिव एवं कर्मचारी किसानों की समिति के सचिवों का बाट जोह रहे हैं पर अभी तक गेहूँ का एक भी दाना नही खरीदा गया है।

इसके पीछे मानना है की अभी गांवों मे गेहूँ की कटाई का काम चल रहा है जिसकी वजह से अभी गेहूँ लेकर किसान नही आ रहे हैं। जानकारों का कहना है की सहकारी समिति पर गेहूँ का भाव बाजार भाव से कम है जिसकी वजह से भी किसान क्रय केन्द्रों पर गेहूँ बेचने से कतराते हैं।

बता दें की इस बार गेहूँ का समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल शासन द्वारा तय किया गया है वहीं बाजार मे किसानों को 1700 से 1750 रुपये का भाव मिल रहा है जिसकी वजह से किसान सरकारी क्रय केन्द्र पर जाने मे रुचि नही लें रहे। सरकारी क्रय केन्द्र पर गेहूँ न बेचने का एक कारण वहाँ से नगद भुगतान न होना भी बताया जा रहा है। आयर स्थित साधन सहकारी समिति के सचिव दुर्गा प्रसाद मिश्रा ने बताया की क्रय केन्द्र द्वारा किसानों को गेहूँ की खरीद पर चेक से भुगतान की व्यवस्था है।

उन्होने बताय की किसानों को काशी गोमती सम्युत ग्रामीण बैंक का चेक दिया जायेगा जिसे किसान अपने खाते से निकाल सकेंगे। ऐसे मे गेहूँ देने के बाद पैसा मिलने मे तीन से चार दिन का समय लगेगा वही बाजार मे गेहूँ के बदले नगद पैसा भी मिलना किसानों का क्रय केन्द्रों से मुँह मोड़ना एक बड़ी वजह है। साधन सहकारी समिति के कर्मचारियों का कहना है की अभी गेहूँ की कटाई एवं मड़ाई का काम चल रहा है अगले 15 से 20 दिनों मे गेहूँ की आवक होने लगेगी। वही वे दबे मुँह यह भी स्वीकार कर रहे हैं की कीमत मे अंतर और भुगतान मे देरी के कारण किसानों का रुख सरकारी क्रय केन्द्रों की ओर कम ही रहने की सम्भावना है ।

क्षेत्र के किसानों का मानना है की हमे जब गेहूँ की कीमत बाजार मे सरकारी कीमत से ज्यादा मिल रहा है और नगद भुगतान भी हो जा रहा है तो हम क्यों सहकारी समितियों पर गेहूँ दें । किसानों की माँग है की सरकार को किसानों के गेहूँ की कीमत बाजार भाव के बराबर देनी चाहिये अन्यथा किसान क्रय केन्द्रों की ओर नही जाना चाहेंगे । वही गेहूँ खरीद के लक्ष्य के बाबत पूछने पर बताया गया की शासन से कोई लक्ष्य नही मिला है परंतु ज्यादा से ज्यादा गेहूँ खरीदने का लक्ष्य क्रय केन्द्रों को दिया गया है ।

अब ऐसे मे यह देखना दिलचस्प होगा की क्या किसान अपना गेहूँ बाजार मे ऊँची कीमतों ओर बेचते हैं या कम कीमत पर सहकारी समितियों को देते हैं यह आने वाले वक्त मे ही पता चलेगा ।फिलहाल अभी ग्रामीण इलाकों मे गेहूँ की कटाई का काम तेजी से चल रहा है ।

रिपोर्ट – नागेंद्र कुमार यादव

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