भारतीय न्यायायिक इतिहास का सबसे तेज फैसला

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रायगढ/ छत्तीसगढ़ : मार्च 17/प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शहाबुद्दीन कुरेशी ने आज न्यायायिक इतिहास का सबसे तेज फैसला सुनाते हुये हत्या का प्रयास करने वाले को सात साल सश्रम कारावास से दंडित किया । यह फैसला न्यायालय में विचारण के लिये प्रस्तुत होने के एक माह सात दिन के रिकार्ड समय में आया जो अब तक के न्यायायिक इतिहास में मिल का एक पत्थर साबित होगा । 27 जनवरी 17 पेश किये गये इस मामले में तिब्बतराम राठिया उर्फ गिदवा पर आरोप था की उसने डाहीडाड के सुशील बडा़ की गर्दन पर 31अक्टूबर 16 को शाम 6.30 बजे टांगी से वार कर जानलेवा हमला किया था ।

सुशील उसी दिन उसे खेत मे काम करने के लिये बुलाने गया था तो उसने जाने से इंकार कर दिया ओर शाम को सुशील खेत से घर आया तो उसने देखा की गिदवा उसकी ओरत से हडियां शराब मांग रहा था जिसे देने से उसने मना कर दिया इससे गिदवा अपने घर आ गया तभी सुशील तम्बाकु मांगने उसके यहां आया तो उसने पीछे से उस पर टंगिया का वार कर दिया खून से लथपथ सुशील अपने घर भाग कर आया ओर पत्नी को बताया तो उसने गांव के शंकर मझवार व रफेल को बुलाकर उसे अस्पताल भिजवाया तथा धर्मजयगढ़ थाने मे रिपोर्ट दर्ज करायी जिस पर पुलिस नें भा.द.वि.की धारा 307 के तहत मामला पंजीबध्द कर चालान धर्मजयगढ़ थाने में पेश किया जिसमें 18 जनवरी 17 को उसे सजा सुनाई गयी थी वहा से यह प्रकरण सेशन ट्रायल के लिये रायगढ़ न्यायालय में 27 जनवरी 17 को विचारण के लिये प्रस्तुत हुअ जिसमें आज सजा सुना दी गयी ।मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहन सिंह ने पैरवी की ।

रिपोर्ट–हरदीप छाबड़ा

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