सुल्तानपुर में कोटा चयन प्रक्रिया में हुई धान्धलेबाज़ी

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सुलतानपुर(ब्यूरो)- जिले के कादीपुर विकास खण्ड के खतीवपुर ग्राम पंचायत में उचित दर विक्रेता की दुकान चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी कर अधिकारियों कर्मचारियों के भ्रष्टाचार व मनमानी का मामला प्रकाश में आया हैं| ग्राम पंचायत खतीवपुर में नई ग्राम पंचायत गठन के पश्चात यहाँ उचित दर विक्रेता की दुकान का चयन होना था किन्तु यहाँ पूरी चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का मकड़ जाल नजर आया।

अधिकारियों कर्मचारियों का आलम यह है कि न लेखा न बही हम जो कहे वही सही वाली कहावत दिखाई पड़ी चयन प्रक्रिया के तह में जाने पर पता चला कि अवैधानिक रुप से किसी एक व्यक्ति से लाभ पहुचाने के लिए नियमो, कानूनो की अनदेखी की गई है। ग्राम पंचायत में उचित दर विक्रेता की चयन प्रक्रिया की अधिसूचना अधिकारियो कर्मचारियो व प्रधान के मनमुताबिक न होने से 3 बाद फेल हुई चैथी बार की प्रक्रिया 04.08.2016 को प्रारम्भ हुई जिसमें 4 अभ्यार्थियो में से दो अभ्यर्थी किन्ही कारण बस अपना नाम वापस ले लिए मैदान में श्रीमती मिथिलेष गिरी व विनोद कुमार बचे। मिथिलेष गिरी ने विनोद कुमार पुत्र छोटेलाल के विरुद्ध ग्राम प्रचायत का निवासी न होने का आरोप लगाया और वहा मौजूद खण्ड विकास अधिकारी कादीपुर, ग्राम पंचायत अधिकारी अरुण सिंह, ग्राम प्रधान मोती लाल मौर्या के समक्ष विनोद कुमार के किषुनदासपुर के निवासी होने का प्रमाण निवास प्रमाण पत्र संख्या 496162030540 जारी दिनाँक 10.08.20के16 व किषुनदासपुर के प्रधान के द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र एवं विनोद के मकान की खतौनी गाटा सं0 218 प्रस्तुत कर विरोध जताया किन्तु मौजूद अधिकारियो ने प्रमाण को नजर अंदाज कर कार्यवाही रजिस्टर में अपने पद का दुरउपयोग करते हुए 925 मतदाताओ वाली दस ग्राम पंचायत में 920 व्यक्तियो की भ्रामक उपास्थित विनोद कुमार के पक्ष दर्षाकर श्रीमती मिथिलेष गिरी पक्ष में षून्य दर्षा दिया है।

अभ्यार्थिनी श्रीमती मिथिलेष गिरी के पति विजय कुमार गिरी का कहना है कि इस पूरी चयन प्रक्रिया में सीधे पैसे व रसूख का इस्तेमाल हुआ है। मैने इस पूरे प्रकरण की षिकायत उपजिलाधिकारी कादीपुर से किया और बताया कि कोटा चयन प्रक्रिया में विनोद कुमार अपनी सत्यता को छिपाकर गलत तरीके से कोटा हासिल करना चाहते है लेकिन कोई सुनवाई नही हुई। अभिलेखो के जाच करने के बाद जो हकीकत सामने आयी चैकाने वाली थी। विनोद कुमार पुत्र छोटेलाल वर्तमान में किषुनदासपुर में निवास करते है कि चयन प्रक्रिया से पहले विनोद कुमार के पिता छोटेलाल किषुनदासपुर के परिवार रजिस्टर में क्रमाक 13 पर दर्ज है 7 सदस्यो वाले परिवार में तीसरे नम्बर पर विनोद कुमार का नाम अकिंत है। श्रीमती मिथिलेष गिरी की अपत्ति पर हस्ता देख छोटेलाल किषुनदासपुर से नाम काटने का आवेदन दिया तथा 13.07.2016 को किषुनदासपुर के नाम काटा गया अधिकारियो ने आँख मूदकर कार्यवाही जारी रखी इन्हे यह भी ध्यान नही था कि कोटा चयन की पहली बैठक 17.0़6.2016 दूसरी बैठक 22.06.2016 और तीसरी बैठक 12.07.2016 को हुई तीन बैठक हो जाने के बाद 13.07.2016 को परिवार रजिस्टर से नाम कटना स्वयं सन्दिग्ध है। इनके निवासी होने के दूसरे पहलू को देख जाय किषुनदासपुर के हल्का लेखपाल ने 17.10.2016 को अपनी जाच रिपोर्ट में किषुनदासपुर का निवासी होना दर्शाया है वही दूसरी तरफ उपजिलाधिकारियो ने अपनी जाच आख्या में खतीवपुर में दुकान को मकान बताते हुये खतीवपुर ग्राम से जारी निवास प्रमाण पत्र संख्या 496162014953 जारी दिनाँक 17.06.2016 के प्रमाण पत्र को सही ठहरा रहे है जबकि 17.06.2016 को जारी निवास प्रमाण पत्र किषुनदासपुर से नाम कटने से 26 दिन पहले जारी हुआ और जिस समय यह प्रमाण पत्र जारी हुआ उस समय हल्का लेखपाल राधेष्याम प्रजापति निलम्बित होने के बावजूद अपनी रिर्पोट लगा कर जारी किया। जो जाच का विषय था।

विजय बहादुर गिरी ने बताया कि जाँच अधिकारी को जाँच की सीडी प्रस्ताव की कापी, परिवार रजिस्टर की नकल सहित अनेक साक्ष्य दिये लेकिन अधिकारी सारे सबूतो और वयानो को नजर अंदाज कर चयन प्रक्रिया अवैधानिक व अन्यायपूर्ण तरीके से करने को उतारु है चयन प्रक्रिया के बाद किषुनदसुर गाव से परिवार रजिस्टर से नाम कटाना, मूल निास की खतौनी, प्रस्ताव में उपस्थिति संख्या की जाच पर कोई अधिकारी या कर्मचारी टिप्पणी करने से बच रहा है तहसील व ब्लाक कर्मियो की मिली भगत का यह एक छोटा कारनामा है नियम और कानून न्याय मायने नही रखता।

रिपोर्ट- संतोष यादव

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