चन्दा माँगकर पिता ने की शहीद की अन्त्येष्टि

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जौनपुर (ब्यूरो)- जिस जांबाज नौजवान ने देश की रक्षा के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों की आहुति दे दी उसने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि प्रशासनिक अमला उसकी शहादत पर गर्व करते हुए उसके परिजनों के हर दुख दर्द में सहभागी होने की बजाय उसकी लाश को श्मशान घाट पर लावारिशों की भाँति जलता हुआ छोड़कर चला जाएगा और उसके वृद्ध व असहाय पिता को अपने शहीद पुत्र के शव की अन्त्येष्टि में उयोग की गयी लकड़ी के खर्च को चुकाने के लिए रामघाट पर लोंगो से चन्दा इकट्ठा करना पड़ेगा।

जी हाँ, यह सच है। दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि मंडल से बात करते हुए शहीद पारस नाथ सरोज के पिता दुदौली गाँव निवासी भूसी राम सरोज ने बताया कि जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वे शहीद पुत्र के शव को रामघाट पर अन्तिम संस्कार के लिए लेकर गये जहाँ जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक सहित तमाम आला अधिकारी उपस्थित रहे , और सम्मान के साथ शव को चिता पर रखकर मुखाग्नि दी गयी। किन्तु चिता जलने के बाद सभी अधिकारी मौके से नदारद हो गये। पुत्र को खोने के गम में अर्धविक्षिप्त से हो चुके पिता उस समय किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये जब  अन्त्येष्टि के पश्चात लकड़ी वाले ने उनसे साढ़े सात हजार रूपये की माँग की। पिता के पास एक रूपया भी नहीं था। वह समझ रहा था कि अन्तिम संस्कार का खर्च प्रशासन देगा। मजबूर बाप लोगों के सामने हाथ फैलाकर पैसा माँगने लगा। कई लोगों से चन्दा जुटाकर पाँच हजार रुपये इकट्ठे हो पाये , लकड़ी वाले ने उतने में ही सन्तोष कर लिया।

यह वाकया बताते हुए शहीद के पिता फफक पड़े। इस घटना से व्यथित अधिवक्ता संघ के मन्त्री ने जब इस बावत जानकारी लेने के लिये जिलाधिकारी को फोन किया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ और अपर जिलाधिकारी ने बताया कि अन्त्येष्टि का खर्च वहन करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
रिपोर्ट-डा०अमित कुमार पाण्डेय
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