भोजुपरी की मिठास लोक गायकी के पितामह वीरेन्द्र सिंह उर्फ धुरान काका का निधन

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बलिया,ब्यूरो। ‘भाषा भोजपुरी परिभाषा से परिपूरी ह, बोले से पहिले एकर बूझल जरूरी ह’, ‘गर पानी पैवत प्यार प्रीत की रीत सीख लें आप सभी’ व ‘जिला ह छोट चोट करें पहिले केहू पर, हीरा मोती उगले ली एहीजा के माटी’ इत्यादि गीतों से भोजुपरी की मिठास लोक गायकी के पितामह वीरेन्द्र सिंह उर्फ धुरान काका (105) का बुधवार की शाम को निधन हो गया। धुरान काका के निधन की सूचना से जनपद ही नहीं, बल्कि बिहार प्रांत के बक्सर, छपरा, सिवान में धुरान के शिष्य पहुंचने लगे। गुरुवार को धुरान काका की शवयात्रा पैतृक गांव बसंतपुर से निकलकर हनुमानगंज, बलिया होते हुए महावीर घाट पर गंगा के किनारे पहुंची, जहां उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। मुखाग्नि उनके इकलौते पुत्र निर्भय सिंह ने दिया। शवयात्रा में धुरान काका के गानों को स्वर देकर उनके शिष्य उन्हें श्रद्धांजलि देते रहे। धुरान काका ने शिव विवाह ‘अइसन दुलहा ना देखनी बाप रे बाप’ गाकर लोगों के दिल में विशेष स्थान बना लिया था।

संस्कृति से लवरेज धुरान काका की गायकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद उन्हें राष्ट्रपति भवन बुलाकर उनकी गंवनई को सुने थे। अपने जमाने में यूपी, बिहार, झारखण्ड, दिल्ली, बंगाल में अपनी गायकी से लोगों का दिल जीता है। चइता में उनका कोई सानी नहीं था। वैसे, धुरान को समय-समय पर बहुत सारे पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से ‘यश भारती’ सम्मान न मिलना जनपदवासियों को हमेशा टिसता रहेगा। शवयात्रा में छाई पाण्डेय, मुनीब साहनी, तारकेश्वर ठाकुर, ईश्वरदयाल पाण्डेय, मुक्तेश्वर दूबे, मनोहर गुप्त, विजय पाठक, मनीष ठाकुर, शैलेन्द्र मिश्र राजू, मनोज चौबे, काशी ठाकुर, सत्यदेव सिंह, सुभाष, धनंजय सिंह, सत्येन्द्र सिंह, लड्डू पाण्डेय, रामदहिन भारती सहित ध्रुवनारायण सिंह, अरविन्द सिंह, मारकण्डेय सिंह, दिनेश पाण्डेय, रामप्रवेश, गुल्लू सिंह, विनायक शरण सिंह, मानवेन्द्र सिंह, दीना राम, अजय शंकर सिंह, पशुपति सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, सोनू सिंह, जयप्रकाश सिंह, कुबेर सिंह आदि शामिल रहे। उधर, नारदीय शैली के गायक विरेन्द्र सिंह धुरान के निधन पर कलाकारों में शोक व्याप्त है। अपनी शैली से भोजपुरी लोकगीत को एक नया आयाम देने वाले धुरान काका के जाने से भोजपुरी लोक संगीत को एक बहुत बड़ी क्षति हुई है। इसकी भरपाई करना नामुमकिन है। संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के आर्य समाज रोड स्थित कैम्प कार्यालय पर रंगकर्मियों ने शोक प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। आशीष त्रिवेदी, ओमप्रकाश, आनंद चौहान, अमित पाण्डेय, चंदन, सुनील, अमित यादव, बसंत कुमार, स्मृति निधि, सोनी, टविंकल, संदीप, राजू पाण्डेय, उमाकांत, अजय, अर्जुन, शुभम मौजूद रहे।

रिपोर्ट–संतोष कुमार शर्मा

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