बच्चों ने मनाया “फादर्स डे”

जालौन (ब्यूरो) ‘फादर्स-डे’ एक ऐसा दिवस होता है, जब घर के बेटे या बेटियां अपने घर के मुखिया यानी ‘पिता’ को याद करते हैं। पिता घर का वह हिस्सा होता है, जो गम में अपनी आंखें कभी नम नहीं होने देता और खुशियों को साथ मिलकर बांटता है। पिता बिना किसी स्वार्थ के अपना पूरा जीवन अपने बच्चों की परवरिश में लगा देता है। पिता के अहसानों का बदला किसी भी कीमत पर नहीं चुकाया जा सकता। लेकिन ‘फादर्स-डे’ के मौके पर हम उनके प्रति अपने प्रेम को याद व उसका इजहार तो कर ही सकते हैं। पिता के प्रति अपनी श्रृद्धा को दिखाते हुए ‘फादर्स-डे’ के मौके पर नगर के बेटे, बेटियों ने पिता के प्रति अपनी भावनाओं का इजहार कुछ यूं किया।


मुस्कान खन्ना, सृष्टि चैहान कहती हैं कि मां के चरणों में स्वर्ग होता है, मां बिना जीवन अधूरा है। लेकिन मां यदि जीवन की सच्चाई है, तो पिता जीवन का आधार। यदि मां बिना जीवन अधूरा है, तो पिता बिना अस्तित्व अधूरा है। जीवन तो मां से मिल जाता है, लेकिन जीवन के थपेड़ों से निपटना तो पिता से ही आता है। किसी भी बेटे या बेटी की पहली कामयाबी तब तक अधूरी है, जब तक कि उसके पिता आकर उसकी पीठ नहीं थपथपाते हैं। इस ‘फादर्स-डे’ पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी ‘‘आओ हम सब कुछ ऐसा करें जिससे हमारे पापा को हम पर गर्व हो।’’


आकांक्षा चैहान व जागृति उदैनियां कहती हैं कि आज का युवा भले ही कितना भी आधुनिक और आत्म निर्भर क्यों न हो गया हो, पर पिता ही जीवन के पहले वह शख्स हैं जिनसे बच्चा समाज और दुनिया के बारे में जानना शुरू करता है। पिता, जो कभी मां का प्यार देते हैं, तो कभी शिक्षक बनकर गलतियों को बताते हैं, तो कभी दोस्त बनकर कहते हैं कि ‘‘मैं तुम्हारे साथ हूं’’। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मेरे हर कदम पर मेरे पिता मेरे साथ हैं। इस ‘फादर्स-डे’ पर मैं अपने पापा से कहना चाहूंगी ‘‘आई लव यू पापा।’’


मनीष स्वर्णकार उर्फ मोनू, शिवम माहेश्वरी, राजा माहेश्वरी कहते हैं कि अगर मां परिवार की धुरी है, तो पिता एक ऐसा आवरण है जिसके पहलू में रहकर हम अपने जीवन की सफल शुरूआत करते हैं। जीवन की दशा और समाज की दशा के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करने वाले पिता के योगदान के समतुल्य तो कुछ नहीं हो सकता। परंतु ‘फादर्स-डे’ के रूप में हमें पिता के लिए कुछ कहने का एक मौका जरूर मिला है। जब हम उनके प्यार, मदद और अपनेपन को महसूस कर उनसे यह कह सकें कि ‘‘आज मैं जो भी हूं या आगे जो भी बनूंगा, वो आपके बिना संभव नहीं था।’’


अनमोल खन्ना, कपिल गुप्ता, मानव मिश्रा उर्फ छोटू कहते हैं ‘‘दुनियां में पिता ही एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जो यह चाहते हैं कि उनका बेटा उनसे भी ज्यादा तरक्की करे, उनसे भी ज्यादा नाम कमाए।’’ आज के बदलते दौर में जहां हर व्यक्ति जीवन की आपाधापी में व्यस्त है। ऐसे में ‘फादर्स-डे’ के रूप में हमें एक ऐसा दिन जरूर मिला है, जब हम उनके प्रति अपने सम्मान को प्रदर्शित कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here