मोदी सरकार में आये महिला कर्मचारियों के अच्छे दिन, 18 लाख से ज्यादा महिला कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

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नई दिल्ली- सरकारी और प्राइवेट सभी जगह काम करने वाली महिला कर्मचारियों के आ गए अच्छे दिन, मोदी सरकार ने महिला कर्मचारियों की सुख और उनकी सुविधाओं का ख़याल रखते हुए मैटरनिटी बिल 1961 में सुधारों को मंजूरी दे दी है | इस बिल के संसद में पास हो जाने के बाद देश में कार्यरत तक़रीबन 18 लाख से ज्यादा महिला कर्मचारियों को लाभ मिलेगा |

क्या है मैटरनिटी बिल की मुख्य बातें –

मैटरनिटी बिल में मोदी सरकार के संसोधन को यदि संसद के सभी सदस्यों के द्वारा मान लिया जाता है तो ऐसे में निजी सेक्टर (प्राइवेट कंपनियों) में काम करने वाली गर्भवती महिलाओं को 12 हफ़्तों की जगह 26 हफ़्तों की मैटरनिटी छुट्टी मिल सकेगी |

मैटरनिटी छुट्टी का अर्थ होता है कि जब कोई महिला गर्भवती होगी तो उसे 26 हफ़्तों तक अपने दफ्तर आने की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन कम्पनियाँ उसे पूर्ण तनख्वाह भेजती रहेंगी |

नए मैटरनिटी बिल में मोदी सरकार ने संसोधन करते हुए लिखा है कि यदि कोई महिला किसी बच्चे को गोद लेती है तो उसे भी उस बच्चे की देखभाल के लिए 12 हफ़्तों की छुट्टी दी जायेगी |

नए मैटरनिटी बिल के अनुसार निजी सेक्टर की जिन कंपनियों में 50 से अधिक कर्मचारी कार्यरत होंगे उन्हें कार्यालय परिसर में ही एक क्रैच भी बनाना होगा |

हालाँकि केंद्र सरकार ने नए मैटरनिटी बिल में इस बात का भी प्रावधान किया है कि 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव केवल शुरूआती 2 बच्चों के लिए ही मिलेगी | इसके बाद तीसरे या फिर उससे अधिक बच्चों के लिए मात्र 12 सप्ताह की ही छुट्टी मिल सकेगी |
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