तमाम जद्दोजहद के बीच अंत में नागपुर जेल में दे दी ही गयी याकूब मेमन को फांसी

0
225
याकूब मेमन फाइल फोटो
याकूब मेमन फाइल फोटो

मुंबई 1993 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी याकूब मेमन को आज सुबह 7 बजे से थोडा पहले ही फांसी के फंदे पर लटका दिया गया I याकूब मेमन के ऊपर मुंबई में हए सीरयल बम ब्लास्ट में वित्तीय सहायता पहुंचाने का आरोप था I

याकूब मेमन का भाई टाइगर मेमन और अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम इस पूरे मामले के मास्टर माइंड थे, चूँकि याकूब खुद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट था इसलिए इस पूरे मामले में वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति याकूब मेमन के द्वारा की गयी थी I धमाके से एक दिन पहले ही याकूब मेमन अपने पूरे परिवार के साथ भारत को छोड़ पाकिस्तान पहुँच गया था I लेकिन बाद में सुरक्षा एजिंसियों ने बहुत ही कूटनैतिक तरीके से उसे नेपाल से गिरफ्तार किया और फिर उसे भारत लेकर आया गया I

हालाँकि वर्ष 2007 में ही मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट के मुद्दे पर सुनवायी कर रही विशेष टाडा अदालत ने फांसी की सजा सुना दी थी लेकिन 2007 से लेकर अभी तक कभी सुप्रीमकोर्ट तो कभी राष्ट्रपति तो कभी राज्यपाल के यहाँ इस मामले में अर्जियां दाखिल की गयी लेकिन हर जगह से इस आतंकी को केवल और केवल “न” का ही सामना करना पड़ा I

देश के तक़रीबन 300 वरिष्ट लोगों ने, रशूक दार लोगों ने इस मामले में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर याकूब को क्षमा करने की अपील की थी लेकिन राष्ट्रपति और गृहमंत्रालय ने साफ़ कर दिया कि किसी के भी कहने का कोई फर्क नहीं पड़ता और इससे किसी के अपराध में कोई कमी नहीं आती I

कल देर रात राष्ट्रपति के द्वारा याकूब मेमन की दया याचिका को ठुकराये जाने के बाद देर रात ही याकूब के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के घर पर पहुँच गए और चीफ जस्टिस दत्तू से सुबह होने वाली फाँसी को टालने के लिए कहा इस पर काफी विचार विमर्श करने के बाद चीफ जस्टिस ने उन्ही तीन जजों को इस मामले पर फिर सुनवायी करने का आदेश दे दिया I

सुबह तक़रीबन तीन बजे के आस पास भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीमकोर्ट के दरवाजे खुलवाये गए और साथ ही साथ सुप्रीमकोर्ट की लाइब्रेरी को भी खुलवाया गया और वहां से कुछ किताबे रिफरेन्स देने के लिए मंगवायी गयी I 40 मिनट तक इस मामले की सुनवायी करने के बाद सुप्रीमकोर्ट के तीनों जजों ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अब अगर इस मामले में इसे माफ़ी या फिर समय दिया जाता हैं तो वह गलत होगा I सजा सुनाते वक्त सभी प्रक्रियाओं और पहलुओं को बहुत ही अच्छी तरह से ध्यान में रखा गया हैं और अब इस मामले में और समय नहीं दिया जाना चाहिए I

सुप्रीम कोर्ट का तडके सुबह यह फैसला आने के बाद नागपुर जेल के अधिकारीयों ने तुरंत ही तैयारी शुरू कर दी और सुबह तक़रीबन 6:30 बजे के आस-पास याकूब को फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया I फांसी देने के बाद सभी कानूनी प्रक्रियाओं पोस्टमार्टम आदि करने के बाद उसके शरीर को उसके परिवार को सौंप दिया गया I

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

5 × one =