फिक्की के म्यूजियम में लगी आग, ख़ाक में मिल गए डायनासोर

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दिल्ली- राजधानी के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक मंडी हाउस के बाराखम्भा रोड स्थित फिक्की ऑडिटोरियम भवन के छठी मंजिल जिसमें नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री है उसमें आज सुबह तडके आग लग गयी I आग लगने से नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के लगभग सभी दस्तावेज और लोगों को दिखाने के लिए रखी हुई सभी चीजें जलकर खाक हो गयी है I

लगभग सभी चीजें जलकर हो गयी है ख़ाक –
प्राप्त जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है कि, “नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में लोगों को दिखाने के लिए जो भी चीजें और दस्तावेज रखे गए थे वो सभी जलकर खाक हो गए है I अधिकारियों के अनुसार सभी अहम् दस्तावेज और संपत्ति नष्ट हो गयी है, हम अभी भी कुल हुए नुक्सान का अंदाजा नहीं लगा पा रहे है I”

आग बुझाने में लगाई गयी दमकल की 35 गाड़ियाँ –

फिक्की के नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में बताया जा रहा है कि भयंकर आग रात के तक़रीबन 1:30 से 2 बजे के बीच लगी थी और इस आग को बुझाने और इस पर काबू पाने के लिए तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी गयी I दमकल विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए 35 गाड़ियाँ लगा दी थी जिसके बाद सुबह के 6 बजे आग पर काबू पाया जा सका I बताया जा रहा है कि आग पर काबू पाने के चक्कर के दमकल विभाग के कुछ कर्मचारियों को भी नुकसान पहुंचा है I घायल कर्मचारियों को तुरंत ही दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया गया है उनकी हालत अब खतरे से बाहर है I अग्निशमन विभाग के अधिकारी ने कहा है कि आग को पूरी तरह से बुझा दिया गया है हालाँकि अभी भी हमारा अभियान जारी है क्योंकि बिल्डिंग से अभी भी धुवाँ निकल रहा है I

प्रकाश जावडेकर ने दिए ऑडिट के आदेश –
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने आज दुर्घटनास्थल का दौरा किया और उन्होंने स्थित का जायजा लेने के बाद उन्होंने उनके मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सभी प्रतिष्ठानों की एनर्जी एवं फायर ऑडिट करने का आदेश दिया है I जावड़ेकर ने यहां कहा, “संग्रहालय फिक्की की संपत्ति है और हम नुकसान का आंकलन करेंगे I आंकलन रिपोर्ट जैसे ही हमें सौंपी जाएगी, हम देखेंगे कि इसे कैसे दोबारा शुरू कर सकते हैं I”

16 करोंड साल पुराने डायनासोर के जीवाश्म रखे हुए थे – इंदिरा गांधी ने की थी शुरुआत –
बता दें कि यह एक विशेष प्रकार का संग्रहालय था और इसकी शुरुआत करने का श्रेय भारत की पूर्व दिग्गज प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गाँधी को जाता है I आपको बताते चले कि श्रीमती इंदिरा गाँधी की ही पहल पर वर्ष 1972 में इसकी स्थपाना की गयी थी और फिर उन्ही के आदेश पर वर्ष 1978 को पर्यवरण दिवस 5जून के अवसर पर इसे आमजनता के लिए खोल दिया गया था I

देश का यह प्रतिष्ठित म्यूजियम पर्यावरण और वनमंत्रालय के तहत काम करता है I इस म्यूजियम में 16 करोड़ साल पुराना छिपकली प्रजाति के सौरापोड नामक डायनासोर के जीवाश्म हैं I साथ ही इसमें डायनासोर और जंगलों से संब‌ंधित अन्य दुर्लभ जानवारों के जीवाश्म रखे गए हैं I यहां मैसूर के चर्म प्रसाधक वैन इंगेन द्वारा बनाई गई कलाकृतियां हैं I बता दें कि अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि आग में क्या-क्या चीजें जलकर ख़ाक हो गयी है और क्या-क्या बच गया है I

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