दुनिया का पहले सोलर विमान का राज़ और योग से रिश्ता

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भारत की पहली व्यावसायिक उड़ान अहमदाबाद में 83 साल पहले उतरी थी. इस बार एक बार फिर एक क्रांतिकारी उड़ान ने अहमदाबाद के रनवे को छुआ I जब सौर ऊर्जा से उड़ने वाला दुनिया का पहला विमान सोलर इम्पल्स-2 अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरा तो इसने वहां खड़े विशाल जंबो और जेट विमानों की चमक को भी फीका कर दिया I

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दुनिया का पहला सौर उर्जा से उड़ने वाला विमान

आपको बता दें कि पायलट बर्ट्रेंड पिकार्ड इस विमान को अरब सागर पार कराते हुए ओमान के मस्कट से यहां तक ले आए हैं. वो इस परियोजना के निदेशक भी हैं I पिकार्ड कहते हैं, ”हम केवल एक विमान नहीं उड़ा रहे हैं. हम स्वच्छ ऊर्जा को लेकर लोगों और सरकार की इच्छाओं को दिशा भी दे रहे हैं ”

सोलर इम्पल्स-2 के पंख बोइंग 747 के मुकाबले ज़्यादा बड़े (72 मीटर) हैं और इसका वज़न एक एसयूवी कार (2300 किलोग्राम) के बराबर है I लगभग 46.3 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ने वाला सोलर इम्पल्स-2 कला, जुनून और तकनीक से मिलीजुली एक कल्पना के नमूने जैसा है I परियोजना के सह संस्थापक व सीईओ आंद्रे बोर्शबर्ग कहते हैं, ”जब हम इस तरह के विमान को बनाने के लिए उड्डयन उद्योग के महारथियों से मिले तो उन्होंने कहा कि यह संभव नहीं है, आंद्रे बताते हैं, ”इसलिए हमने अपना तरीक़ा निकाला, अब यह सौर ऊर्जा के बल पर रात और दिन दोनों ही समय उड़ान भर सकता है”

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दुनिया का पहला सौर उर्जा से उड़ने वाला विमान

वहीं पायलट बर्ट्रेंड पिकार्ड कहते हैं, ”हम उड्डयन उद्योग की आलोचना नहीं कर रहे बल्कि यह दिखा रहे हैं कि हम वैकल्पिक ऊर्जा और प्रदूषण रहित तकनीक के साथ असंभव को भी संभव करके दिखा सकते हैं ” उनका कहना है, ”हम रोज़मर्रा के कामकाज में ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल के लिए लोगों को प्रेरित कर सकते हैं I ” इसी तरह आंद्रे का कहना है, ”विमान की बैटरियों को गरम होने से रोकने के लिए हमने जो इंसुलेटर इस्तेमाल किया है उसे फ्रिज़ में बिजली बचाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.”

‘मोदी के कारण अहमदाबाद में’

आंद्रे बोर्शबर्ग का मानना है, ”हमारे जैसा विमान यदि मानव रहित हो तो छह महीने तक बिना रुके उड़ सकता है और एक सेटेलाइट की तरह दूरसंचार सेवाएं मुहैया करा सकता है ”अगले पांच महीने में यह विमान एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक की दूरी तय करेगा. प्रशांत और अटलांटिक महासागरों को पार करने से पहले इसका पड़ाव वाराणसी में भी हुआ था I

अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरा दुनिया का पहला सोलर विमान
अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरा दुनिया का पहला सोलर विमान

आंद्रे कहते हैं, ”हम वाराणसी में दुआ मांगेंगे. हम अहमदाबाद में इसलिए रुके क्योंकि मैं पहले नरेंद्र मोदी से मिला था और सौर ऊर्जा को लेकर गुजरात की पहल से प्रभावित था” सोलर इम्पल्स-2 विमान के पंख के ऊपर 17,000 सौर बैटरी लगी हुई हैं. रात के समय उड़ान भरने के लिए लीथियम आयन वाली बैटरियों का इस्तेमाल किया जाता है.

कैसे हैं इनका योग से रिश्ता –

लेकिन इन दोनों पायलटों के लिए जो सबसे अधिक मददगार होता है वो है योग और ध्यान I आंद्रे पिछले 10 वर्ष से योग कर रहे हैं I योग गुरु संजीव भनोट भी उनके साथ रहते हैं I

कॉकपिट में योग और ध्यान –

भनोट एक अन्य विमान में साथ चलने वाले 60 सदस्यों के दल के साथ रहते हैं. वे कहते हैं, ”उनकी सबसे बड़ी चिंता होती है कि जब विमान उड़ान भरेगा तो क्या पांच दिन तक लगातार दिन-रात उड़ान में उनका शरीर साथ दे पाएगा I”

भनोट बताते हैं, ”मैंने उन्हें ऐसे योगासन सिखाए हैं, जिन्हें कॉकपिट में भी किया जा सकता है, यह बहुत छोटा है लेकिन इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें योग करने की जगह है”

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पिकार्ड और आंद्रे

इसी तरह पायलट बर्ट्रेंड पिकार्ड कहते हैं कि वो खुद को सतर्क रखने के लिए ध्यान की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं I

वहीं आंद्रे कहते हैं, ”हमने खुद को सिम्युलेटर में प्रशिक्षित किया है जहां हम 72 घंटे उड़ान का अभ्यास करते थे और 20 मिनट का आराम होता था ”

फ़ॉर्मूला वन टीम से भी सस्ता
सोलर इम्पल्स-2 विमान को बनाने में 1500 लाख डॉलर (क़रीब 9.5 अरब रुपये) की लागत आई है जिसे इस पूरी परियोजना पर 13 वर्ष में खर्च किया गया I  पिकार्ड कहते हैं, ”जो फंड हमने इस्तेमाल किया है वो फ़ॉर्मूला वन की एक टीम खड़ी करने के लिए जरूरी लागत का चार प्रतिशत है ”

प्रदूषण रहित तकनीक का संदेश देने के लिए पिकार्ड और आंद्रे अहमदाबाद में सरकारी अधिकारियों और छात्रों से मुलाक़ात करने जा रहे हैं.

पिकार्ड को विमान उतारने की इजाज़त देने के लिए अहमदाबाद के हवाई यातायात नियंत्रण केंद्र ने 40 मिनट इंतज़ार कराया था I

विमान पर बहुत सारी एलईडी लगे होने के कारण इस बात से अनजान कई लोगों को यह किसी उड़नतश्तरी जैसा लगा I पिकार्ड कहते हैं, ”अन्य निर्धारित उड़ानों की लैंडिंग तक उन्होंने हमें इंतज़ार कराया, लेकिन हमारे साथ ईंधन का कोई मुद्दा नहीं था और हम पूरी रात हवा में ही रह सकते थे.”

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दुनिया का पहला सौर उर्जा से उड़ने वाला विमान

‘राइट ब्रदर्स जैसा अहसास’

पिकार्ड और आंद्रे अपनी इस उड़ान की एक सदी पहले के उस क्षण से तुलना करते हैं जब राइट ब्रदर्स ने इंसानों को पंख दिए थे, पिकार्ड कहते हैं, ”राइट ब्रदर्स ने 111 साल पहले एक नई शुरुआत की थी, लगभग वैसा ही हम आज कर रहे हैं” ,पांच महीने तक चलने वाली इस साहसिक यात्रा के लिए मोनाको में एक कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है I

Disclaimer-: All data collected from BBC, we are not using this valuable content for the business purpose, we using it for the promotion  the value of solar energy  .

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