सरकार के लिये बाढ़-बचाव, टेढ़ी खीर

कुशीनगर (ब्यूरो) इस वर्ष का मानसून सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन बाढ़ बचाव के नाम पर तैयारियां शून्य हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 जून तक चौकियों के साथ-साथ बाढ़ शरणालय भी सक्रिय हो जाने चाहिए थे, लेकिन अभी तक मौके पर कुछ भी नहीं दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर कागज में सभी तैयारियां पूरी करते कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। जबकि मौके पर न तो कर्मचारी तैनात हैं और न ही जरूरी संसाधन ही उपलब्ध कराए गए। माना जा रहा है कि अब तक जो तैयारी हुई है, वह नारायणी के पानी बढ़ने के बाद बचाव के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हल्का लेखपाल, कानूनगो व ग्राम पंचायत अधिकारी के साथ बाढ़ खंड के कर्मचारी चौकियों या बाढ़ शरणालय की हालत तक देखने नहीं पहुंचे, जहां गंदगी की वजह से रहने लायक नहीं है। यहाँ से प्रमुख बंधों की दूरी क्रमशः एपी अर्थात पिपराघाट-अहिरौलीदान बंधा- शून्य से 17.15 किमी (लंबाई), अमवा खास बंधा- 10.65 किमी (लंबाई) -छितौनी भैंसहा-14.400 किमी (लंबाई) है।

जनपद में बाढ़ चौकियों की बात करें तो यहाँ कुल 29 बाढ़ चौकियां है, जिसमें संवदेनशील छितौनी के भैंसहा व अमवाखास के अमवादीगर -एपी बंधे पर पिरोजहां चैनपट्टी है | बाढ़ शरणालय पर अगर नजर डालें तो कुशीनगर में कुल 11 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं। इसमें बाढ़ से प्रभावित होने वाले छोटी गंडक से नेबुआ नौरंगिया व बड़ी गंडक से विशुनपुरा व सेवरही, तरयासुजान व खड्डा थाना क्षेत्र शामिल हैं। इसके लिए पडरौना तहसील में 1, कसया में 2, तमकुहीराज में 3, हाटा में 2, कप्तानगंज में 2, खड्डा में 1 बाढ़ शरणालय बनाए हैं। कागज में चालू हो चुके इन शरणालयों में पडरौना में 18004, कसया में 35715 व तमकुहीराज में 56242 जनसंख्या प्रभावित होती है। आकड़ो के अनुसार नावों की उपलब्धता देखी जाये तो यहाँ छोटे नाव-85, मझोले नाव -113, बड़ी नाव-53 की संख्या दर्शाते हैं। जबकि नाव संचालित करने वाले नाविकों की सुने तो उनका भुगतान वर्षों से बकाया है।

पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान अहेतुक सहायता पहुंचाने व पीड़ितों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने वाले नाविकों में ध्रुव कुमार, मंगूल प्रसाद कहते हैं कि कई बार आवेदन करने के बाद भी तहसील प्रशासन द्वारा भुगतान नहीं किया गया। गरीबी के इस धंधे में भी लोगों की प्राणरक्षा के लिये ये अपने कार्य में अब भी पूरी मुस्तैदी दिखाते हैं
बात अगर बंधे की सड़कों पर आये तो ये पूर्णरूपेण क्षतिग्रस्त हैं, इन पर कभी किसी अधिकारी की नजर नही जाती या यूँ कहें कि कमीशन की चकाचौध से मानकों को ताक पर रखना यहाँ विभागीय अधिकारियों की पुरानी कार्यशैली है।

ब्लाक मुख्यालय से अमवा व एपी बंधे को जोड़ने वाली सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। अगर बंधों के संवदेनशील स्थान पर पहुंचना हो, तो घंटों समय बर्बाद होता है परन्तु अधिकारियों की नजर इसपे कभी नही जाती।

जर्जर बंधे की मरम्मत समयावधि के अंदर ना होने से रेनकट व रैट होल वाले स्थानों एपी व अमवाखास बंधे की हालत नाजुक हुई है। माना जा रहा है कि समय से कार्य न कराए जाने से स्थिति और भी खराब होगी।इस सन्दर्भ में एडीएम कृष्ण लाल तिवारी का कहना है कि बाढ़ चौकियां व बाढ़ शरणालय पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। आठ-आठ घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दावा किया कि सभी तैनात कर्मचारी रात्रि विश्राम कर रहे हैं।

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