अपने गुणगान के लिए 526 करोंड़, गरीब मजबूर जनता की सेलरी देने के लिए दिल्ली सरकार के पास फंड नहीं

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दिल्ली सरकार के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी का राजनीति की मुख्यधारा में आने का केवल और केवल एक ही कारण था वह यह कि वह राजनीति को सभ्य और साफ़ सुथरी छवि देना चाहते थे I वह राजनीति से भ्रस्टाचार को हटाना चाहते थे I लेकिन आज अगर आम आदमी पार्टी की सरकार के कामकाजों पर नजर डालें तो वही सभी बातें बिलकुल प्रयत्यक्ष रूप से सामने दिखाई पड रही हैं जिनका कभी यह पार्टी विरोध करती हुई नजर आती थी I

देश की दूसरी पार्टियों ऊपर अरविन्द और उनकी टीम के आरोप –

  • अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी के लोगों को अक्सर यह आरोप लगाते हुए सुना गया हैं कि देश की बाकी सभी पार्टियाँ जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल करती हैं I
  • अरविन्द और टीम का आरोप था कि टैक्स पेयर के पैसे से पार्टियाँ अपना खुद का प्रचार करती हैं I
  • अरविन्द और उनकी टीम का यह दावा था कि प्रदेश सरकारों के पास इतना पैसा हैं कि जिससे आसानी से सरकार चलाई जा सके I
  • अरविन्द और उनकी पार्टी के मुख्यलोगों का हमेशा से दूसरी पार्टियों के ऊपर आरोप था कि वह परिवारवाद में विश्वास रखती हैं I

अब हम अरविन्द और उनकी टीम के द्वारा शासित दिल्ली सरकार के साथ इन आरोपों का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं –

  • सभी पार्टियाँ जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल करती हैं अक्सर हमनें केजरीवाल टीम के मुंह से सुना हैं कि देश की सभी पार्टियाँ जनता की ईमानदारी और मेहनत से कमाये गए पैसे का गलत इस्तेमाल करती हैं तो आज की दिल्ली सरकार जिसके मुख्यमंत्री स्वयं अरविन्द केजरीवाल जी हैं उस सरकार में हम देखते हैं कि जनता के पैसे की बर्बादी किस तरह से हो रही हैं I जनता के मेहनत की उसी कमाई को सरकार काम न करने के बजाये अपनी सरकार के गुणगान करने में खर्च कर रही हैं I और उसी पैसे के माध्यम से सरकार अपने ही साथियों का लगातार अपमान करते हुए अपनी ब्रांडवैल्यू को मजबूत करने में जुटी हुई हैं ! केजरीवाल साहब हुआ न जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल

 

  • टैक्स पेयर के पैसे से पार्टियाँ करती हैं खुद का प्रचार अरविन्द और उनकी टीम का देश की बाकी पार्टियों के ऊपर आरोप था कि पार्टियाँ स्वयं अपने प्रचार के लिए सरकारी धन का प्रयोग करती हैं I लेकिन आज केजरीवाल पार्टी द्वारा दिल्ली सरकार पर नजर डालें तो पता चलता हैं कि दिल्ली के अन्दर कि हर मेट्रो में लिखा मिलता हैं – जो कहा वह किया, वह परेशान करते रहे हैं हम काम करते रहे हैं आदि आदि – अब सवाल यह उठता हैं कि सरकारी पैसे से यह केजरीवाल साहब किसका प्रचार कर रहे हैं ? दिल्ली सरकार का या फिर अपना ? अगर माननीय मुख्यमंत्री जी यह कहते हैं कि हम दिल्ली सरकार के कामों का प्रचार कर रहे हैं तो हम यह जानना चाहते हैं कि सरकार को भला कौन परेशान कर सकता हैं ? अगर सरकार को कोई परेशान कर सकता हैं तो मतलब सरकार चलाने वालों के अंदर काबिलियत की कमी हैं I और अगर सरकार पार्टी का प्रचार कर रही हैं तो पैसे की बर्बादी कर रही हैं दिल्ली सरकार और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के नियमों की अवहेलना भी कर रही हैं I

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  • इतना पैसा होता हैं सरकार के पास कि उससे सरकार चलायी जा सके

चलो मान भी लेते हैं कि सरकार अपने द्वारा किये गए बड़े-बड़े महान कामों का प्रचार कर रही हैं तो दिल्ली की पूर्व सरकार ने भी यह बहुत अच्छे-अच्छे काम किये थे जिनमें से उन्होंने दिल्ली के लोगों को सबसे बड़ी सौगात मेट्रो भी एक हैं दी थी और उस शीला सरकार ने जिसके खिलाफ अक्सर भ्रस्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के बड़े-बड़े आरोप लगाये गए थे उस सरकार ने तो अपने कर्मों का हिसाब 33 करोंड में दे दिया था I

तो आज माननीय मुख्यमंत्री जी जोकि हमेशा से ईमानदारी, भ्रस्टाचार की बातें करते थे आज उनका अपना खुद का प्रचार बजट देखें तो पता चलता हैं कि पिछली सरकार की तुलना में 16 गुना ज्यादा हैं, शीला सरकार का 2013-2014 इसी काम के लिए बजट था 33 करोंड और आम आदमी पार्टी सरकार का बजट हैं 526 करोंड I वह भी अज जबकि पूरी दुनिया केवल और केवल विकास की बात कर रही हैं I

दिल्ली सरकार के अपने कर्मचारियों को समय पर सेलरी देने के लिए सरकार यह कहती फिरती हैं कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं I डी.टी.सी. के लगभग 12,000 सेवा निवृत्त कर्मचारियों को वेतन देने के नाम पर सरकार यह कह देती हैं कि सरकार के पास फंड नहीं हैं और सरकार अपने प्रचार के लिए ऐसे हालातों में भी 526 करोंड़ रूपये अपने प्रचार के लिए कैसे खर्च कर सकती हैं ?

हाल ही में MCD के कर्मचारियों ने इसी बात को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया था और उस मामले में देश की न्यायालय को सामने आकर दिल्ली सरकार के मामले में हस्तक्षेप करके उन लोगों की तनख्वाह का इंतजाम करवाना पड़ा था I

आज भी दिल्ली की आंगनबाड़ी और आशा वर्कर जिनकी सेलरी महीने की मुश्किल से 1 हजार से 3 हजार के बीच में हैं उनकी भी तनख्वाह पिछले दो महीने से सरकार ने रोक रखी हैं I सरकार को इनका भुगतान करने से बेहतर अपना प्रचार करना अधिक उचित लगता हैं I तक़रीबन दिल्ली के अन्दर 3 हजार आशा और आंगनबाड़ी कर्मचारी हैं जिनके घर इसी 1 हजार से 3 हजार रूपये में चलते हैं I सरकार उनका पैसा नहीं दे रही हैं और अपने प्रचार के लिए 526 करोंड रूपये खर्च कर रही हैं क्या यह भ्रस्टाचार नहीं हैं ? क्या यह जनता के पैसे की बर्बादी नहीं हैं ? क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं हैं ? इसका जवाब कौन देगा मुख्यमंत्री जी ?

  • भाई-भतीजा वाद – अरविन्द और उनकी टीम का आरोप था सभी पार्टियों का कि देश की सभी पार्टियाँ सरकारी पदों पर या फिर अपनी टीम में अपने नजदीकियों को रख कर देश में भाई-भतीजावाद की राजनीति करती हैं I

अब जरा माननीय अरविन्द जी की सत्ता धारी पार्टी के भाई-भतीजावाद पर नजर डालते हैं –

अपने आपको आम-आदमी, आम जनता का हमदर्द, देश से वी.आई.पी. कल्चर, भ्रस्टाचार को खत्म करने जैसी तमाम बड़ी-बड़ी बातें करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की यह सच्चाई अगर आप जान जायेंगे तो आपके होश ही उड़ जायेंगे कि कैसे सरकारी पैसों को वह अपनी पार्टी और अपने पुराने सहयोगियों को दे रहे हैं फायदा I

आपको बता दें कि अपने आपको आम आदमी कहने वाले अरविन्द केजरीवाल ने सरकारी खर्चे पर 27 लोगों को अलग-अलग कामों के लिए अपने और अपनी पार्टी के साथ रखा हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री जी अपने पास से नहीं बल्कि सरकारी पैसे यानि की दिल्ली की जनता के भरे हुए टैक्स के पैसे से उनकी तनख्वाह, मोबाइल, घर, गाडी, पर्सनल ऑफिस आदि का इंतजाम करते हैं I

आज यहाँ हम आपके सामने वह कुछ नाम लेकर आ रहे हैं, यह सब तो नहीं हैं लेकिन यह उन 27 में से कुछ जिससे आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कैसे आम आदमी हैं, और इस आम आदमी के क्या-क्या और कैसे-कैसे खर्चे हैं ?

  • आपकी सरकार में यह पहले गैर सरकारी लेकिन सरकारी अफसरों से बढ़कर भी सुविधाओं का लाभ उठाने वाले

नाम – विभव कुमार

पद – प्राइवेट सिक्रेटरी

प्रति माह सेलरी – तकरीबन 1,00,000 (1 लाख रूपये)

सुविधाएं – बंगला, ऑफिस, फोन आदि

यह आम आदमी अरविन्द केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाते हैं !

 

आपकी सरकार की गैर सरकारी लेकिन सरकारी से भी अधिक दूसरी यह हैं

नाम – अस्वाथी मुरलीधरन

पद – ज्वाइंट सेक्रेटरी

सेलरी – तकरीबन 1 लाख के आस पास इनकी भी

सुविधायें – इन्हें भी बंगला, ऑफिस और फ़ोन बिलकुल फ्री दिया गया हैं

अब आपकी इस सरकार के तीसरे ब्यक्ति हैं

नाम – आशीष तलवार

पद – पॉलिटिकल एडवाइजर

सेलरी – 1,15,881

सुविधायें – इन्हें गाडी और ऑफिस दिया गया हैं

आपको बता दें कि आशीष तलवार आम आदमी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक गिने जाते हैं और देश भर में होने वाले चुनाओं में रणनीतियां बनाने में इन्हें काफी महारत हासिल हैं, अब सवाल यह कि क्या पार्टी के लिए काम करने वाले ब्यक्ति को भी सरकारी खजाने से ही पैसा दिया जाएगा I

 

इनके साथ ही साथ यह हैं

नाम – स्वाती मालिवाल

पद – गेविएंसेस एडवाइजर

मासिक सेलरी – 1,15,881

सुविधाएं – इन्हें भी सरकारी खर्चे पर ही गाडी और ऑफिस मुहैया करवाया गया हैं I

आपको बता दें कि यह तो केवल 4 लोग ही हैं जिनके ऊपर सरकार इतना खर्च कर रही हैं अब हम आपको बता दें कि ऐसे कुल 27 लोग हैं जो कि सरकारी धन का यूँ कहें तो दिल्ली की जनता के धन को बर्बाद कर रहे हैं I

इस रिपोर्ट को भी पढना न भूलें – अपने आपको आम-आदमी कहने वाले अरविन्द केजरीवाल, कर रहे हैं जनता के पैसे की बर्बादी, अपने निजी लोगों को बाँट रहे हैं सरकारी पैसे से गाड़ी, मकान, ऑफिस और मोबाइल

BY – धर्मेन्द्र सिंह

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