जिला कारागार से चार शातिरों के फरार होने से मचा हड़कम्प, 72 घंटे का समय बीत जाने के बाद भी नहीं लगा सुराग

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मैनपुरी (ब्यूरो)– कहावत है- गर जेब हो भारी, तो ऊचीं नहीं है जिला कारागार की चाहर दीवारी। शायद यही वजह रही होगी कि जिला जेल प्रशासन होली के रंग में मस्त था और शातिर जेल में सेंध लगा रहे थे। जिला जेल से फरार हुये चार शातिरों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था में छेद कर दिया है। जेल की दीवार फांदकर फरार हुये चार शातिर अपराधियों को तीन दिन से अधिक समय बीतने को जा रहा है मगर लगातार छापेमारी कर रही पुलिस की दर्जनों टीमों के अभी भी हाथ खाली है। मामले को गंभीरता से लेते हुये एडीजी जेल ने जेलर सहित छः जेल कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। भगोडे शातिरों में शामिली का एक शूटर सामिल है। चार शातिरों के भाग जाने के बाद से जिला जेल व जिला प्रशासन में हड़कम्प मचा हुआ है।

बताते चले कि सोमवार को जिला प्रशासन होली की मस्ती में झूम रहा था। इसी बीच जेल में बंदियों और कैदियों को भी करीब नौ बजे बैरिंकों से बाहर निकालकर होली खेलने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद रंग ऐसा चढ़ा कि जेल प्रशासन भी रंगों में सराबोर होकर मस्ती में झूमने लगा। दोपहर लगभग दो बजे सभी कैदियों को बैरिकों में भेजने से पहले उनकी गिनती हुई तो चार कैदी कम निकले। इनमें से एक कैदी तो हत्याओं के आरोप में आजन्म कैद काट रहा था।

दोवारा गिनती में बैरिक नम्बर एक में निरूद्ध मुंशाद पुत्र शाहदीन निवासी खंदावली थाना कांधला, जिला शामिली, बैरिंक नम्बर दो से राजेन्द्र सिंह उर्फ डाक्टर पुत्र जयमन सिंह निवासी सोनारकोट जिला अलमोड़ा उत्तराखंड, बैरिंक नम्बर सात से सुनील कुमार पुत्र कढोरी लाल निवासी ग्राम अटरियां थाना आटा जिला जालौन और अवयस्क बैरिंक से योगेश पुत्र शंकर लाल निवासी हलपुरा थाना मटसेना जिला फिरोजाबाद गायव मिले। चार शातिरों के गायव होने की जानकारी होती ही। जिला जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया। इस घटना की जानकारी जिलाधिकारी चन्द्रपाल सिंह व एसपी सुनील कुमार सक्सेना को लगभग तीन घंटे देरी से दी गयी। सूचना मिलते ही एसपी सुनील कुमार सक्सेना ने फरार बंदियों की गिरफ्तारी के लिये कई टीमों को गठन किया। बुधवार की देर सायं तक फरार बंदियों का कोई सुराग तक नहीं लग सका। पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही है।

2007 में भी फरार हुये थे चार कैदी-
जिला जेल से फरार हुये चार कैदियों की यह पहली घटना नही है। 12 सितम्बर 2007 की रात भी चार बंदी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गये थे। इनमें राजू निवासी दिवलपुर थाना विछवां, समरपाल निवासी भदेही थाना किशनी, स्वदेश निवासी बरौली थाना भोगांव तथा धीरज निवासी नगला मूले कोतवाली ने बंदी रक्षक को घायल कर घटना को अंजाम दिया था। इसकी जानकारी जेल प्रशासन को तत्काल हो गई थी। इसके बाबजूद भी चारों कैदी सीड़ी लगाकर जिला जेल से फरार हो गये थे। लगभग दो महीने बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

जेलर सहित छः बंदी रक्षकों पर गिरी गाज
एडीजी जेल जीएल मीणा ने जेल की दीवार फांदकर चार बंदियों के फरार हो जाने के मामले में जेलर सुरेश मिश्रा तथा बंदी रक्षक चेतराम, ओमनरायण, भारतेश कुमार, रेशजिओ, श्रीकृष्ण गूजर और छोटे लाल शंखवार को जिम्मेदार माना है। बंदी रक्षकों को बरिष्ठ जेल अधीक्षक आगरा एसएचएन रिजवी ने निलंबन करने का आदेश दिया हैं। वही जेलर सुरेश मिश्रा को एडीजी जेल जीएल मीणा ने निलंबित करने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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