दोस्त या फिर दहशतगर्द, मुस्लिम धर्म के उपर से उठ रहा मानवता का भरोसा |

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आजकल सोशल मीडिया में हाल ही में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले का मामला बेहद जोरों पर है | इस पूरे हमले को एक तरफ कर दें दूसरी तरफ इस पूरे आतंकी हमले में तारीषी जैन की हत्या का मामला हिन्दुस्तान में सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा छाया हुआ | कुछ मीडिया हाउसेस ने तारीषी जैन के दोस्त फराज हुसैन को जहां एक ओर एक सच्चा दोस्त ठहराया है तो वही दूसरी तरफ कुछ मीडिया हाउसेस ने फराज हुसैन को एक आतंकी करार दिया है |

वास्तव में मामला क्या है और इसके पीछे की सच्चाई क्या है यह अभी तक किसी के सामने नहीं है आई है लेकिन सोशल मीडिया पर इस बात का पुरजोर खंडन किया जा रहा है कि फराज हुसैन एक ईमानदार दोस्त नहीं बल्कि एक आतंकी था जो खुद उस समूह के लोगों से मिला हुआ था |

इस पूरी न्यूज़ का खंडन करने वालों ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो फुटेज के हवाले से लिखा है कि फराज हुसैन एक आतंकी था और उसने खुद तारीषी जैन का गला रेतकर बड़ी बेरहमी से ह्त्या की है | इसके पीछे की सच्चाई का अभी तक बाग्लादेश की सरकार या फिर सेना की तरफ से कोई खुलासा नहीं किया गया है लेकिन एक बात तो साफ़ है कि आज एक ही समुदाय, एक ही धर्म के मानने वाले जिस तादाद में आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहे है देश और दुनिया की तमाम आम जनता का उनके ऊपर से भरोषा उठता जा रहा है |

tarushi jain

और उठे भी तो क्यों न ? जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर इस बात का खंडन किया है कि फराज हुसैन एक अच्छा दोस्त नहीं बल्कि एक खतरनाक आतंकी था उन्होंने कुछ फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किये है जिनमें साफ़ देखा जा सकता है कि जिन आतंकियों ने ढाका के रेस्टोरेंट में आतंकी हमले को अंजाम दिया था उनके साथ फराज हुसैन के बेहद गहरे संबंध थे | ये बात फोटो में साफ़ दिख रही है | वह बहुत अच्छे दोस्त थे | साथ ही साथ फराज को आतंकी बताने वालों ने एक वीडियो भी शेयर की है जिसमें फराज को गन लेकर रेस्टोरेंट के गेट पर पहरेदारी करते हुए भी देखा जा सकता है | हालाँकि यह वीडियो इतना साफ़ नहीं है कि जिससे एकदम इस बात का दावा किया जा सके कि वास्तव में वह फराज हुसैन ही था लेकिन इस बात से नकारा भी नहीं जा सकता है कि वह फराज हुसैन नहीं था क्योंकि देखने में तो वह बिलकुल फराज हुसैन जैसा ही दिख रहा है |

बात जो भी हो, चाहे फ़राज़ हुसैन एक ईमानदार दोस्त रहा हो या आतंकी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला अब लेकिन सोशल मीडिया पर जिस तरह से इस पूरे प्रकरण को लेकर लोगों के भीतर खासकर के युवाओं के भीतर मुस्लिम धर्म के मानने वालों के प्रति रोष है, अविश्वास की भावना है यह समाज के लिए, एक आदर्श समाज के लिए बेहद दुखद है | समाज दो भागों में, दो टुकड़ों में बंटने को तैयार खड़ा है, यह दुनिया जानती है कि जब भी समाज दो बंटा है विनाश ही लाया है |

जिधर से भी देखिये इस मामले पर लोगों की प्रतिक्रियायें आ रही है हर कोई इसका, इस न्रशंस हत्याकांड, आतंकवादी हमले और आतंकवादी की निंदा कर रहा है लेकिन क्या निंदा करने से सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा ? क्या एक विशेष धर्म के लोग जिस तरह से आम समाज में अपना विश्वास खोते जा रहे है, क्या लोग उनपर कभी विश्वास कर पायेंगे ? मुझे तो नहीं लगता कि कभी ऐसा होने वाला है |

अगर समाज को एकजुट करना है और खासकर के मुस्लिमों को लोगों के भीतर फिर से अपने लिए सम्मान की भावना या फिर विश्वास को उत्पन्न करना है तो उन्हें आतंकवाद का पुरजोर विरोध करना होगा | दुनिया को यह बताना होगा कि भले ही उनके धर्म के कुछ लोग आतंक का समर्थन करते है, कुछ लोग दहशतगर्द है लेकिन ज्यादातर मुस्लिम समाज मानवता में विश्वास रखता है | आज विश्वव्यापी आंदोलन चलाने की आवश्यकता है लेखकों और विचारकों को अपनी लेखनी पैसे के लिए नहीं, अपनी आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नहीं बल्कि आतंकवाद और आतंकवादियों का विरोध करने के लिए उठानी होगी | नहीं तो मै यह बात दावे के साथ कह सकता हूँ कि वह दिन दूर नहीं जब इस पूरी दुनिया में हर ब्यक्ति इस धर्म के मानने वालों से संबंध तोड़ लेगा उसके बाद क्या होगा यह तो ईश्वर ही जनता है मै तो बस यही कह सकता हूँ कि जो भी होगा वह शायद ठीक नहीं होगा |

मुस्लिम धर्मगुरुओं और धार्मिक मुस्लिम संस्थाओं को अब वास्तव में अगर समाज के भले की चिंता है तो उन्हें आगे आकर इस पर काम करना चाहिए न कि अपनी धर्म की बड़ी-बड़ी डींगे मारते रहना चाहिए | आये दिन जो किसी भी बिना मतलब की बातों पर फतवें जारी करने वाली मुस्लिम संस्थाएं और धर्म गुरुओं को चाहिए कि अब नींद से जागें और सामने आकर इस पागलपन, वहशीपन का विरोध करें और आम दुनिया के लोगों को यह बतायें कि वह मानवता में विश्वास करते है | किसी टीवी चैनल पर अपने धर्म की वकालत करने से बेहतर है कि वास्तविक धरातल पर उतर कर कुछ ढंग का काम करें | फतवा ही जारी करना है तो आतंक और आतंकवादियों के विरुद्ध जारी करें | आये दिन इतने सारे आतंकियों को पूरी दुनिया में पकड़ा और मारा जाता है लेकिन कोई भी धर्म गुरु या फिर कोई मुस्लिम धार्मिक संस्था आतंकियों के विरोध में फ़तवा जारी करते हुए नहीं दिखती है आखिर क्यों ? यह सवाल केवल मेरा नहीं है, यह सवाल आज दुनिया के हर एक आम आदमी की जुबान पर है बस मैंने उन लोगों की आवाज को शब्दों में ढलने की कोशिश की है |

धर्मेन्द्र सिंह

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