मायावी मकड़जाल से गंगा मईया रूठकर आकाश गमन की ओर : रमाशंकर तिवारी

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बलिया(ब्यूरो)- अगाध आस्था के बावजूद गंगा के अस्तित्व पर आये अनहोनी संकट के प्रति भारतीय जनमानस में सार्थक जनांदोलन खड़ा करने की प्रवृत्ति वहीं विकसित हो रही है। गंगा अब सरकार के शाब्दिक नारों से नहीं बचने वाली है। इसके लिए हम सभी को अपनी सुख-सुविधा का भी परित्याग करना पड़ेगा।

उक्त सम-सामयिक भावोद्गार गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी के है। वे गंगा दशहरा के पावन अवसर पर विचला गंगा घाट पर गंगा के लिए गंगा को दीप दिखाने, हनुमान जी की अराधना कर धरा-धाम पर उनके बने रहने तथा भक्तों संग नदी से कचरा, प्लास्टिक की थैलियां आदि निकालने के पश्चात स्नानार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आर्थिक तंत्र के विशाल मायावी मकड़जाल से गंगा मईया रूठकर आकाश गमन की ओर मुखाबिव है। सरकार पतित पावनी के गहरे संकेत को बखूबी समझने में नादानी कर रही है। केन्द्र गंगा की इबारत पढे और सार्थक तथा कठोर निर्णय लेकर उसकी अविरलता बहाल करें। इस अवसर पर श्री तिवारी के साथ धीरज गुप्त, शुआली सिंह, अजय वर्मा, सर्वेश्वर दासजी, जनार्दन यादव, रविन्द्र पाण्डेय, दीपक दुबे, सुनिल सिंह, राहुल यादव आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट- संतोष कुमार शर्मा 

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