गड्ढे युक्त सड़के लोगो के लिए बन रही है हर रोज यमराज

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प्रतीकात्मक फोटो

डलमऊ/रायबरेली (ब्यूरो)- प्रदेश सरकार ने भले ही 15 जून तक गढ्ढा मुक्त सड़क बनाने का सपना देखा हो वो तारीख तो कब की निकल चुकी है | शहर मुख्यालय की सड़कों का क्या कहना, मज़ा आ जाता लोगो को सड़कों पर चलते वक़्त देखकर कभी लोग रोड पर पड़े मिलते है या कोई बड़ा गड्ढा उन्हें निमंत्रण देके जमीन पर बुला लेता है |

बरसात से पहले जो सड़के गड्ढे मुक्त कर दी गई थी आज उन सड़को पर अगर बरसात हो जाये तो आदमी तो जिंदा ही डूब जाए | जो बनाई गई सड़क थी वो तो उखड़ी ही साथ मे नीचे वाली सड़क को भी उखाड़ ले गई | अब इससे ही अंदाजा जनता लगा सकती है कि कितनी मानकों से गुजरने के बाद सड़को का निर्माण करवाया जाता है |

सड़को की सूरत देखकर यही पता चलता है कि विभागीय अधिकारियों ने उनकी मरम्मत कराने के नाम पर किस कदर लूट घसोट कर सड़को पर जुल्म ढाया गया है। हर बार जो भी सरकार होती हैं जनता को बढिया सा लॉलीपॉप देकर बेवकूफ बनाती है की हमारे यहां सारा काम मानक से ही किया जाएगा लेकिन सब उसी ढर्रे पर आ जाते है | यही हाल ग्रामीण छेत्रो की सड़कों का है जहाँ किसान हर रोज मंडी निकलता हैं कि उसकी सब्ज़ियां,अनाज की बिक्री हो जाये लेकिन इन खराब सड़को की वजह से वो समय से मंडी नहीं पहुँच पाता |

आये दिन राहगीर चोटहिल होते है लेकिन किसी का क्या जाता हैं सब अपने कामो में मशगूल जो है | डलमऊ कस्बे के सडको की हालात तो एेंसे है कि सड़क पर वाहन लेकर चलना तो दूर पैदल चलना भी दूभर है। वही लोगो की जुबान पर गड्ढे मुक्त के बजाय गढ्ढा युक्त सड़क का सवाल मजाकिया बनने लगा है। डलमऊ जगतपुर मार्ग पर छोटे व बडे मिलाकर इतने गढ्ढे है कि आप गिनती करे तो गिनतियों की संख्या खत्म हो सकती है। परन्तु सडक पर बने गढ्ढो की संख्या नही खत्म हो सकती।

इस मार्ग पर सैकडो भारी वाहनो के साथ साथ स्कूली वाहन एंव साइकिलो से छात्र -छात्राओ का आवागमन लगा रहता है। मार्ग में बने गढ्ढो में बारि का पानी भरा होने के कारण राहगीरो को पैदल चलना भी मुकिल है। वही दूसरी तरफ डलमऊ फतेहपुर राष्ट्रीय राज मार्ग पर बने गढ्ढे में बारि का पानी जमा होने से आय दिन राहगीर गिरकर घायल हो रहे है। ग्रामीणो ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियो की लापरवाही का खामियाजा राहगीरो को भुगतना पड़ रहा है। उक्त मार्गो की मरम्मत कराने के लिये तहसील दिवसो मे कई शिकायती पत्र दिये गये लेकिन विभागीय अधिकारी अपनी लाज बचाने के लिये गढ्ढो में पीली इंर्ट डालकर पडला झाड़ लेते है।

रिपोर्ट- अनुज मौर्य/मोहित 

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