मैनपुरी जनपद में धड़हल्ले से चल रहा है जुुआ, सट्टा और कच्ची शराब के उत्पादन का धंधा

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मैनपुरी (ब्यूरो) जुआं सट्टा व शराब बंद कराने की शासन की नीति तथा बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कठोर निर्देशन के बाद भी मैनपुरी जनपद में धड़हल्ले से जुआ सट््टा- शराब के धंधे हो रहे है। सट्टा जुआं व शराब के माफिया तो रातों-रात धनार्थ हो रहे है लेकिन गरीब वर्ग के लोग सट्टा, जुआ- शराब के धंधे में फसने के बाद दिन व दिन गरीब हो रहे है और इस सट्टा जुआ – शराब के कारण कंगाल होने पर घरेलू लड़ाई झगड़े के कारण आत्महत्या कर रहे है। जनपद में कुछ थानों के प्रभारी अधिकारियों की जानकारी के बाद भी जुआ सट्टा व शराब को धंधा चल रहा है तथा आबकारी विभाग के जानकारी के बाद भी कच्ची शराब के उत्पादन का कारोबार बंद नहीं हो रहा है। इससे शासन प्रशासन दोनो की ही छवि धूमिल हो रही है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि जनपद के कुछ थानाध्यक्षों की जानकारी में जुआ, सट्टा, कच्ची शराब के अवैध धंधे धडहल्ले से हो रहे है और इन धंधों के माफिया दबंगी से इन धंधों को कर रहे है। जहां सट्टा, जुआ धंधा कस्बों में खुलेआम हो रहा है वही पुलिस विभाग की नाक के नीचे शहर के तमाम मौहल्लों में जुआ, सट्टा लगाने के ऐजेन्ट दिन भर बैठकर लिखापढ़ी करके लोगों को गुमराह करके एक रूपये के नौ रूपये के लोभ में फसाकर कारोबार करते देते जाते है। जुआ सट्टे के धड़हल्ले से चलने वाले अंड्डे भाॅवत चैराहे के पास क्रांसिग पर, छपट्टी, करहल रोड़, करहल चैराहा, आगरा रोड़, कृष्णा टाकीज के पास, पत्थर मंडी, आगरा गिहार काॅलोनी, मदार दरवाजा, घंटाघर चैराहे पर होना कहा जाता है। जबकि यहां सभी जगह पुलिस चैकियां मौजूद है। जुआ, सट्टे के खिलाफ तमाम वार अखवारों ने सुर्खियों में समाचार भी छापे है लेकिन इन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस संबंध में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के कठोर रूख के कारण कुछ दिनों के लिये जुआ, सट्टा रूक गया था। मगर अब जुआ सट्टा का कारोबार फिर उसी पुराने धर्रे पर शुरू हो गया। शहर में इस धंधे के माफियों को पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारियों की नजर में भी है। लेकिन लोग इस बात की चर्चा कर रहे है कि इन माफियाओं पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है।

जुआ सट्टे की तरह कच्ची शराब के उत्पादन का अवैध धंधा ईशन नदी व काली नदी के किनारे के गांवों में खुलेआम चल रहे है। ये गांव पुलिस प्रशासन तथा आवकारी विभाग ने चिन्हित भी किये है और पिछले जिलाधिकारी तथा पुलिस अधिकारी के कठोर निर्देश पर इन गांव में छापेमारी भी की गयी थी और प्रचुर मात्रा में कच्ची शराब के जखीरे भी पाये गये है। पुलिस विभाग तथा आवकारी विभाग में इन गांवों की अच्छी जानकारी है। लेकिन इस संबंध में ठोस कार्यवाही न होने के कारण यहां धडहल्ले से ये अवैध धंधा चल रहा है। सबसे दुखद पहेलू यह कहा जा रहा है कच्ची शराब धंधे के माफिया तो अपने धंधे को चलाने के लिए दबंगई से कच्ची शराब के धंधे के गांव में अपना कारोबार चलवाते है। लेकिन इन गांव मंे अवैध शराब के धंधे होने के कारण यहां की महिलाओं को शराब के धंधे में लगे अपने पतियों के जोर जुल्म सहने पड़ते है। जनपद के बरिष्ठ अधिकारी चिन्हित गांवों का भ्रमण करें तो उन्हे अवश्य ही इन धंधे में लगे लोगों की महिलाओं के ऊपर हो रहे जुल्म जरूर पता चलेगे।

लोकप्रिय जिलाधिकारी यशवंत राव व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश एस से जनपद के बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि जुआ, सट्टा व कच्ची शराब पर रोक लगाई जाये और गरीब तबकों को इन माफियाओं के चुगंल से बचाया जाये। इस संबंध की मांग करने वालों मंे प्रमुख रूप से जुझारू सक्रिय नेता व भोगांव विधान सभा के प्रभारी अरविन्द्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय जनवादी कवि रामौतार शशि, राष्ट्रीय मीडिया के अध्यक्ष किशोर इटावी आदि जनपद के तमाम बुद्धिजीवी सक्रीय नेता है।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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