कूडे़ के ढेर बने शहर की पहचान, राहगीर परेशान

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बहराइच (ब्यूरो) स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत तो हुई लेकिन स्वच्छता की राह मे शहर बहराइच कहां तक पहुंचा ये बात मायने रखती है। स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत जानने के लिए हमारे संवाददाता राकेश मौर्या ने शहर को खंगाला और जाना स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत।

हिन्दू धर्म में कहा जाता है कि घरों की साफ-सफाई से घरों में लक्ष्मी का वास होता है।जिससे सुख,समृद्धि,प्राप्त होती है।उक्त बातों से साफ सफाई का महत्व जरूर ज्ञात होता है।लेकिन अगर हम बात करे पूरे शहर की तो यहां कूड़े का अंबार,उन पर पनपती मकि्खयां और जल रहे कूडे़ से निकल रहा जहरीला धुआं ही शहर की पहचान बना हुआ है।ये शहर के किसी एक भाग की समस्या नही बल्कि शहर के चारों तरफ यहीं समस्या बरकारार है ।जिससे रोजाना जिला मुख्यालय आने वालें राहगीरों को पहले इस कूड़े के अंबार से रूबारू होना पड़ता है।फिर शहर में प्रवेश कर पाते है।कूड़े के ढेर से उठने वाली बदबू असहनीय होने से राहगीर परेशान है।शहर के बाहर निवास करने वाले लोग शहर में कदम रखने से कतराते है।

वैसे स्वच्छता को लेकर जिला प्रशासन की पहल सिर्फ मीडिया के कैमरे तक ही सीमित रहती है।उसके बाद स्वच्छ भारत के मिशन के पैर उखड़ जाते है।जिले में स्वच्छता को लेकर गांवों में टीमें भी गठित की गयी है।जिसमें हर शनिवार सुबह झाड़ू लगाकर स्वच्छता की अलख जागायी जाती है लेकिन ये अलख सिर्फ और सिर्फ मीडिया के कैमरे में कैद होने तक रहती है।उसके बाद ठंडे बस्ते में समा जाती है।केन्द्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार स्वच्छता को लेकर करोडों रूपयें खर्च कर रही है लेकिन नतीजा सब तरफ से शून्य आ रहा है।चाहे वो शहर या गांव।

रिपोर्टः- राकेश मौर्या बहराइच

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